Target Tv Live

40 करोड़ की सुरक्षा के बीच बिजनौर बैराज पर फिर संकट: गंगा की धारा ने बढ़ाई चिंता

40 करोड़ की सुरक्षा के बीच बिजनौर बैराज पर फिर संकट: गंगा की धारा ने बढ़ाई चिंता

गंगा की धारा तटबंध से टकराई तो बढ़ी चिंता, 150-200 मजदूर सुरक्षा में जुटे; पहले जारी विज्ञप्ति वापस लेने से उठे सवाल

बिजनौर। अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर बैराज के तटबंध को करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से एसीबीएम तकनीक के जरिए मजबूत किए जाने के बावजूद गंगा की बदलती धारा ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा शुरू कर दी है। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश के बीच गंगा के जलप्रवाह में बढ़ोतरी हुई है। बैराज से करीब 1,19,800 क्यूसेक पानी गंगा में बह रहा है, जबकि जलस्तर 218.60 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से करीब 1.40 मीटर नीचे बताया जा रहा है।

हालात इसलिए गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि गंगा की धारा का झुकाव और घुमाव उसी संवेदनशील हिस्से की ओर बताया जा रहा है, जहां पिछले वर्ष तटबंध पर दबाव बढ़ गया था। सिल्ट जमा होने से धारा के बहाव का दायरा भी करीब 150 मीटर से घटकर 50 मीटर रह गया है। ऐसे में पानी का दबाव सीमित क्षेत्र में केंद्रित होने से तटबंध पर कटान का खतरा बढ़ गया है।

40 करोड़ की मजबूती के बाद भी क्यों बढ़ी चिंता?

तटबंध की सुरक्षा के लिए एसीबीएम तकनीक से सीमेंट-कंक्रीट से भरी तिरपालनुमा संरचना बिछाई गई थी। इसका उद्देश्य गंगा की तेज धारा और कटान से तटबंध को सुरक्षा देना था।

सिंचाई विभाग के स्तर से सामने आई जानकारी के अनुसार, गंगा की धारा ने तटबंध के अंदर की तरफ कटान किया है। इसके कारण एसीबीएम से तैयार संरचना का कुछ हिस्सा अपनी मूल स्थिति से खिसककर गहराई की ओर चला गया है। कुछ स्थानों पर इस संरचना में दरार आने की बात भी कही गई है।

यानी करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सुरक्षा व्यवस्था के सामने अब नदी की बदलती धारा ने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

150 से 200 मजदूरों को लगाया गया, परक्यूपाइन स्टड से रोकने की कोशिश

शुक्रवार को जिलाधिकारी जसजीत कौर, एसडीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने तटबंध का निरीक्षण किया। इसके बाद तटबंध की सुरक्षा के लिए करीब 150 से 200 मजदूरों को लगाया गया।

मजदूर कट्टों में मिट्टी भरकर गंगा में डाल रहे हैं। इसके अलावा परक्यूपाइन स्टड तैयार कर उनमें पेड़ बांधकर पानी के बहाव वाले स्थानों पर डाले जा रहे हैं। इनका उद्देश्य गंगा की तेज धारा की रफ्तार कम करना और तटबंध पर सीधे पड़ रहे दबाव को कमजोर करना है।

दो पैनल क्षतिग्रस्त होने की बात ने बढ़ाई चिंता

तटबंध की सुरक्षा व्यवस्था में करीब 50 मीटर के दायरे में दो पैनल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी भी सामने आई है। यदि नदी की धारा इसी तरह तटबंध से टकराती रही और कटान बढ़ा तो सुरक्षा कार्यों को लगातार विस्तार देने की जरूरत पड़ सकती है।

विशेषज्ञ दृष्टि से देखें तो यहां चुनौती सिर्फ जलस्तर की नहीं है। सिल्ट जमा होना, नदी की धारा का संकुचित होना और संवेदनशील हिस्से की तरफ पानी का मुड़ना—तीनों परिस्थितियां एक साथ मौजूद हैं।

फिर बदला सूचना विभाग का रुख, विज्ञप्ति जारी कर बाद में हटाई

बिजनौर बैराज की स्थिति को लेकर उस समय एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब सूचना विभाग की ओर से एक विज्ञप्ति जारी कर कुछ जानकारी साझा की गई। इसके बाद पत्रकारों से उस समाचार को प्रकाशित नहीं करने का अनुरोध किया गया और विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति को भी बाद में हटा दिया गया।

इस घटनाक्रम ने सरकारी सूचना तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए।

मामले में अपर निदेशक सूचना आशुतोष चन्दोला से जब जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि विज्ञप्ति गलती से रिलीज हो गई थी। उनका कहना था कि बाद में हटाई गई उक्त सामग्री अब जिला प्रशासन का वक्तव्य नहीं है।

इस स्पष्टीकरण के बाद स्थिति यह बनती है कि प्रारंभ में जारी आधिकारिक सूचना को विभाग ने स्वयं वापस ले लिया। हालांकि, बैराज पर चल रहे सुरक्षा कार्य, गंगा की धारा का दबाव और मौके पर लगाए गए मजदूरों की मौजूदगी अपने आप में स्थिति की गंभीरता की ओर संकेत करती है।

सवाल: अगर स्थिति सामान्य थी तो इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षा कार्य क्यों?

यहीं से पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल सामने आता है।

यदि तटबंध पर कोई विशेष खतरा नहीं था, तो 150 से 200 मजदूरों को तत्काल सुरक्षा कार्य में लगाने, मिट्टी के कट्टे गंगा में डालने और परक्यूपाइन स्टड लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

और यदि स्थिति इतनी संवेदनशील थी कि बड़े पैमाने पर सुरक्षा कार्य करना पड़ा, तो पहले जारी की गई सूचना को बाद में हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

बेशक, सूचना विभाग ने विज्ञप्ति को गलती से जारी होना बताया है और स्पष्ट किया है कि वह अब जिला प्रशासन का वक्तव्य नहीं है। ऐसे में समाचार रिपोर्टिंग के स्तर पर यह अंतर समझना जरूरी है कि मौके पर चल रहे वास्तविक सुरक्षा कार्य अलग तथ्य हैं, जबकि वापस ली गई विज्ञप्ति को प्रशासन का वर्तमान आधिकारिक बयान नहीं माना जा सकता।

नदी की धारा बनाम करोड़ों की सुरक्षा व्यवस्था

बिजनौर बैराज पर मौजूदा स्थिति को केवल बाढ़ या बढ़ते जलस्तर के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती गंगा की धारा के बदलते स्वरूप की है।

करीब 150 मीटर से सिमटकर 50 मीटर के दायरे में आया बहाव यदि लगातार तटबंध की ओर केंद्रित रहता है तो पानी की मारक क्षमता बढ़ सकती है। ऐसे में परक्यूपाइन स्टड और अस्थायी बचाव कार्य तत्काल दबाव कम करने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए नदी की धारा और सिल्ट प्रबंधन पर भी गंभीरता से काम करना होगा।

TargetTvLive का विश्लेषण

बिजनौर बैराज पर इस समय दो तस्वीरें साथ-साथ दिखाई दे रही हैं। एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तटबंध को आधुनिक तकनीक से मजबूत किए जाने का दावा है, तो दूसरी तरफ गंगा की बदली धारा उसी सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा ले रही है।

सबसे अहम बात यह है कि प्रशासनिक स्तर पर जारी की गई एक विज्ञप्ति बाद में हटा दी गई और उसे अपर निदेशक सूचना ने गलती से रिलीज हुई सामग्री बताया। इसलिए उस विज्ञप्ति को वर्तमान प्रशासनिक बयान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

लेकिन दूसरी ओर, गंगा की धारा का तटबंध की ओर दबाव, एसीबीएम संरचना को पहुंचा नुकसान, मिट्टी के कट्टों से बचाव और 150-200 मजदूरों की तैनाती जैसे जमीनी तथ्य अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर और धारा का रुख क्या रहता है और करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सुरक्षा व्यवस्था इस मानसून की चुनौती का कितना मजबूती से सामना कर पाती है।

TargetTvLive इस पूरे घटनाक्रम पर तथ्यात्मक और जमीनी स्थिति के आधार पर नजर बनाए हुए है।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें