कस्तूरबा विद्यालय में अचानक पहुंचीं DM जसजीत कौर, छात्राओं संग बैठकर खाया खाना; रसोई से पढ़ाई तक खुली व्यवस्थाओं की परत

बिजनौर। सरकारी आवासीय बालिका विद्यालयों में व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सिर्फ फाइलों और रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय जब कोई अधिकारी सीधे छात्राओं के बीच पहुंचता है, तो निरीक्षण का असर अलग दिखाई देता है। बिजनौर में जिलाधिकारी जसजीत कौर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, धर्मनगरी के औचक निरीक्षण में भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। डीएम ने छात्राओं से पढ़ाई के बारे में बातचीत की, भोजन की गुणवत्ता परखी और खुद छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया।
TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट
परीक्षा के बाद छात्राओं से सीधा संवाद
विकासखंड मोहम्मदपुर देवमल क्षेत्र स्थित विद्यालय में डीएम के पहुंचने के समय बालिकाएं अंग्रेजी विषय की परीक्षा दे चुकी थीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यालय में मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। छात्राओं ने पढ़ाई को संतोषजनक बताया।
यह संवाद निरीक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, क्योंकि कागजों पर दर्ज व्यवस्थाओं के बजाय छात्राओं से सीधे फीडबैक लेकर जमीनी स्थिति समझने की कोशिश की गई।
थाली में क्या मिल रहा है, डीएम ने खुद परखा
विद्यालय में भोजन व्यवस्था को लेकर वार्डन ने निर्धारित मेन्यू की जानकारी दी। छात्राओं को सुबह फल और दूध, दोपहर में दाल, चावल, रोटी, सब्जी, रायता और सलाद उपलब्ध कराया जाता है। शाम के समय चाय, बिस्किट, चने और परमल तथा रात्रि भोजन की व्यवस्था है।
डीएम ने केवल मेन्यू सुनकर संतुष्टि जाहिर नहीं की, बल्कि रसोई के सामने तैयार हो रहे भोजन का निरीक्षण किया। उन्होंने भोजन को सुरक्षित और स्वच्छ स्थान पर रखने के निर्देश दिए।
इसके बाद सबसे अहम दृश्य सामने आया। भोजन की गुणवत्ता और स्वाद परखने के लिए जिलाधिकारी ने छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया। भोजन से पहले उन्होंने बालिकाओं के साथ प्रार्थना में भी सहभागिता की।
सामान्य ज्ञान के सवाल से परखी जागरूकता
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से सामान्य जानकारी से जुड़े सवाल भी किए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम पूछे जाने पर छात्राओं ने एक स्वर में योगी आदित्यनाथ का नाम बताया।
डीएम ने बालिकाओं का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें नियमित रूप से फल खाने, भोजन से पहले हाथ धोने और मेहनत व लगन के साथ पढ़ाई करने की सलाह दी।
बाउंड्रीवाल टूटी मिली, तत्काल कार्रवाई के निर्देश
औचक निरीक्षण में विद्यालय की व्यवस्थाओं से जुड़ी एक समस्या भी सामने आई। वार्डन ने बताया कि विद्यालय की एक ओर की बाउंड्रीवाल गिर चुकी है। सुरक्षा के लिहाज से यह महत्वपूर्ण मामला है, खासकर इसलिए क्योंकि यह आवासीय बालिका विद्यालय है।
डीएम ने संबंधित अधिकारी को बाउंड्रीवाल के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इससे साफ है कि निरीक्षण का फोकस केवल भोजन और पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यालय की आधारभूत और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं पर भी रहा।
असली परीक्षा सिर्फ भोजन की नहीं, व्यवस्था की भी
इस निरीक्षण की सबसे बड़ी तस्वीर यही है कि आवासीय विद्यालयों में छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता का आकलन सिर्फ रिकॉर्ड देखकर नहीं किया जा सकता। भोजन का मेन्यू तय होना एक बात है और वही भोजन स्वच्छता, गुणवत्ता तथा स्वाद के मानकों पर खरा उतरना दूसरी।
जिलाधिकारी का छात्राओं के साथ भोजन करना प्रशासनिक निरीक्षण को एक मानवीय स्पर्श देता है। वहीं, टूटी बाउंड्रीवाल का मामला यह भी याद दिलाता है कि सरकारी संस्थानों में नियमित रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी जरूरी है।
डीएम का संदेश: सुविधाएं कागज पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने छात्राओं को उपलब्ध सुविधाओं, भोजन, स्वच्छता और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के साथ बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। इस तरह यह औचक निरीक्षण एक तरफ प्रशासन की निगरानी व्यवस्था का संदेश देता है, तो दूसरी तरफ विद्यालय प्रबंधन के सामने यह अपेक्षा भी स्पष्ट करता है कि बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा, पोषण और स्वच्छता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।
TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट।












