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बिजनौर में बड़ा अलर्ट! चूहों-छछूंदर से फैल सकती है खतरनाक बीमारी, 1123 गांवों में शुरू हुआ विशेष अभियान

चूहों और छछूंदर के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू! 1123 गांवों में चलेगा एक महीने का ऑपरेशन, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

फसल ही नहीं, आपकी सेहत के भी दुश्मन हैं चूहे और छछूंदर… स्क्रब टायफस जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव के लिए कृषि विभाग की खास पहल
रिपोर्ट : अवनीश त्यागी । TargetTvLive

बिजनौर। अगर आपके घर, खेत या अनाज के गोदाम में चूहों और छछूंदर का आतंक है तो अब सतर्क हो जाइए। यह सिर्फ आपकी फसल और अनाज को ही नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि कई गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने की बड़ी वजह भी बन सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए बिजनौर प्रशासन ने पूरे जिले में बड़े स्तर पर विशेष अभियान शुरू कर दिया है।

संचारी रोग नियंत्रण अभियान-2026 (द्वितीय चरण) के तहत 1 जुलाई से 31 जुलाई तक जिले की 1123 ग्राम पंचायतों में चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य गांवों को सुरक्षित बनाना, किसानों की फसल बचाना और लोगों को संक्रामक बीमारियों से बचाना है।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा, इसलिए शुरू हुई विशेष मुहिम

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि बरसात के मौसम में चूहों और छछूंदर की संख्या तेजी से बढ़ती है। इनके शरीर पर मौजूद परजीवी और गंदगी कई खतरनाक बीमारियों को फैलाने का कारण बन सकते हैं। खासकर स्क्रब टायफस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा ऐसे मौसम में अधिक रहता है। इसलिए समय रहते इन पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगर हर परिवार और हर किसान अपने घर, खेत और आसपास की नियमित सफाई रखे और वैज्ञानिक तरीके अपनाए, तो इनकी संख्या आसानी से कम की जा सकती है।

ऐसे करें चूहों पर प्रभावी नियंत्रण

कृषि विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि अनाज हमेशा मजबूत कंक्रीट या लोहे के सुरक्षित पात्रों में रखें, ताकि चूहों को भोजन न मिल सके। खेतों की मेड़ों, झाड़ियों, कूड़े के ढेर और खाली स्थानों की नियमित सफाई भी जरूरी है।

जरूरत पड़ने पर चूहेदानी में रोटी, डबलरोटी या बिस्कुट का चारा लगाकर भी चूहों को पकड़ा जा सकता है। वहीं सक्रिय बिलों में कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई स्वीकृत दवाओं का वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

6 दिन की वैज्ञानिक योजना से मिलेगा बेहतर परिणाम

कृषि विभाग ने चूहों के नियंत्रण के लिए छह दिन की विशेष कार्ययोजना तैयार की है। पहले दिन सक्रिय बिलों की पहचान की जाएगी। अगले दो दिन बिना विष वाले चारे से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। चौथे दिन विषयुक्त चारा रखा जाएगा। इसके बाद मृत चूहों का सुरक्षित निस्तारण कर सभी बिलों को बंद किया जाएगा। यदि दोबारा गतिविधि दिखाई दे तो यही प्रक्रिया फिर अपनाई जाएगी।

लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन बातों का रखें ध्यान

अभियान के दौरान लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

  • चूहामार दवा का प्रयोग करते समय दस्ताने जरूर पहनें।
  • दवाओं को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
  • घर में रखी खाने-पीने की सभी वस्तुओं को अच्छी तरह ढककर रखें।
  • मृत चूहों को कभी भी नंगे हाथों से न छुएं। उन्हें गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबाकर सुरक्षित तरीके से निस्तारित करें।

प्रशासन की अपील— हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

जिला कृषि रक्षा अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने जिले के सभी किसानों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसे अपने परिवार और गांव की सुरक्षा से जोड़कर देखें। यदि सभी लोग मिलकर इस अभियान में भाग लेंगे तो न केवल फसलें सुरक्षित रहेंगी, बल्कि संक्रामक बीमारियों पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

TargetTvLive विश्लेषण

बरसात का मौसम शुरू होते ही संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे समय में बिजनौर प्रशासन का यह अभियान केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। चूहों और छछूंदर की बढ़ती संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी और आर्थिक नुकसान दोनों का कारण बनती है। यदि प्रशासन के साथ आम लोग भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो यह अभियान पूरे जिले को अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और स्वच्छ बनाने की दिशा में बड़ी सफलता साबित हो सकता है।

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