EXCLUSIVE INVESTIGATION
बिजनौर बार चुनाव में ‘गुप्त खेल’ का बड़ा खुलासा! अध्यक्ष की कुर्सी की जंग बनी साजिश, काउंसिल को करना पड़ा हस्तक्षेप
स्पेशल रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | #TargetTvLive
सबसे बड़ा खुलासा (Big Expose):
- बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने चुनाव को बताया अवैध
- अध्यक्ष पद की हाई-प्रोफाइल लड़ाई: राजेंद्र सिंह vs शेर सिंह
- एल्डर्स कमेटी के फैसले के बावजूद चुनाव कराने की कोशिश
- “फर्जी कमेटी” और “मैनेज्ड वोटिंग” के आरोप
- प्रत्याशियों का अचानक बैकआउट, सिस्टम पर गंभीर सवाल
जमीनी पड़ताल: क्या था पूरा ‘गेम प्लान’?
बिजनौर के बार चुनाव में जो सामने आया, वह सिर्फ एक चुनाव नहीं बल्कि संगठित रणनीति और अंदरूनी टकराव की कहानी बयां करता है।
👉 हमारी जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु:
1. चुनाव स्थगित, फिर भी वोटिंग की तैयारी!
एल्डर्स कमेटी ने स्पष्ट रूप से चुनाव स्थगित किया था।
इसके बावजूद एक गुट ने चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
📌 सवाल:
क्या यह सिर्फ अव्यवस्था थी या पहले से तय “प्लान”?
2. अध्यक्ष पद की कुर्सी बनी ‘पावर सेंटर’
इस पूरे विवाद की जड़ में था अध्यक्ष पद का मुकाबला:
- एडवोकेट राजेंद्र सिंह
- एडवोकेट शेर सिंह
👉 दोनों के बीच मुकाबला इतना कड़ा था कि बार के अंदर दो स्पष्ट गुट बन गए।
📌 सूत्रों के अनुसार, इसी टक्कर ने पूरे चुनाव को “हाई-स्टेक पावर गेम” में बदल दिया।
3. ‘फर्जी कमेटी’ और ‘मैनेज्ड वोटिंग’ के आरोप
अधिवक्ता इसरार अहमद “राजा” ने अपने प्रार्थना पत्र में सीधा आरोप लगाया:
“फर्जी कमेटी के जरिए चुनाव कराया जा रहा है”
👉 जांच में यह भी सामने आया कि कुछ अधिवक्ताओं को प्रक्रिया पर भरोसा नहीं था, जिससे असंतोष बढ़ा।
4. व्हाट्सएप से फूटा असली गुस्सा
जैसे-जैसे हालात बिगड़े, प्रत्याशियों ने सार्वजनिक रूप से चुनाव छोड़ना शुरू कर दिया:
- कोमल सिंह – महासचिव पद से हटे
- राजीव धीमान – समर्थन से इनकार
- प्रीति चौहान – कोषाध्यक्ष पद से बाहर
📌 यह सिर्फ बैकआउट नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ खुला विरोध था।
काउंसिल की एंट्री: क्यों लेना पड़ा बड़ा फैसला?
जब मामला नियंत्रण से बाहर हुआ, तब बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सख्त आदेश जारी किया।
अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ ने साफ कहा:
- चुनाव केवल एल्डर्स कमेटी ही कराएगी
- अन्य किसी भी प्रक्रिया को अवैध माना जाएगा
- पूरी चुनाव प्रक्रिया निरस्त
साथ ही कार्रवाई की चेतावनी ने पूरे सिस्टम को हिला दिया।
इन्वेस्टिगेशन एनालिसिस: क्या है असली वजह?
1. कंट्रोल की लड़ाई
यह मामला सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि बार पर नियंत्रण और प्रभाव की जंग बन गया।
2. सिस्टम में भरोसे की कमी
जब उम्मीदवार खुद चुनाव छोड़ रहे हों, तो यह साफ संकेत है कि प्रक्रिया पर भरोसा खत्म हो चुका है।
3. नियम vs पावर
एक तरफ नियम और काउंसिल, दूसरी तरफ गुट और दबाव — यही टकराव पूरे विवाद की जड़ है।
आगे क्या? बड़ा अपडेट आ सकता है!
- मामला हाईकोर्ट तक पहुंच सकता है
- नए चुनाव की घोषणा जल्द
- कई अधिवक्ताओं पर कार्रवाई संभव
- बार एसोसिएशन में बड़ा बदलाव तय
Exclusive Conclusion (बड़ा निष्कर्ष):
बिजनौर बार चुनाव का यह विवाद अब एक “पावर स्ट्रगल एक्सपोज़” बन चुका है, जिसमें नियम, राजनीति और व्यक्तिगत प्रभाव की टक्कर साफ दिखाई दे रही है।
👉 सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है:
क्या अगला चुनाव निष्पक्ष होगा या फिर एक और विवाद सामने आएगा?
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