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6 लड़कियां, एक ही दिन और रहस्यमयी गुमशुदगी… बिजनौर केस ने बढ़ाई पुलिस की टेंशन

6 लड़कियां, एक ही दिन और रहस्यमयी गुमशुदगी… बिजनौर केस ने बढ़ाई पुलिस की टेंशन

मोबाइल लोकेशन हरिद्वार में, पुलिस की कई टीमें सक्रिय — एक गहन खोजी रिपोर्ट

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
स्थान: बिजनौर

एक साधारण परीक्षा, लेकिन असाधारण घटना

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित बिजनौर जिले का चांदपुर क्षेत्र आमतौर पर शांत माना जाता है। लेकिन मार्च 2026 की एक शाम यहां घटी घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। इंटरमीडिएट बोर्ड की संस्कृत परीक्षा देने गईं छह छात्राएं अचानक रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गईं।

परीक्षा खत्म होने के बाद छात्राएं घर नहीं पहुंचीं और देखते ही देखते यह मामला स्थानीय चिंता से निकलकर राज्यस्तरीय खबर बन गया।

छह किशोरियों का एक साथ गायब होना केवल एक पुलिस केस नहीं है — यह ग्रामीण समाज, सुरक्षा व्यवस्था, किशोर मनोविज्ञान और डिजिटल युग की जटिलताओं को भी उजागर करता है।

यह 5000 शब्दों की गहन खोजी रिपोर्ट इस पूरे मामले की परतें खोलने का प्रयास करती है।

घटना का दिन: 12 मार्च 2026

12 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा का कार्यक्रम चल रहा था। उस दिन संस्कृत विषय का पेपर था।

चांदपुर स्थित एक इंटर कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जहां आसपास के कई गांवों के छात्र-छात्राएं परीक्षा देने पहुंचे।

परीक्षा का समय

  • परीक्षा दोपहर बाद शुरू हुई
  • शाम लगभग 5:15 बजे समाप्त हुई
  • इसके बाद छात्र-छात्राएं परीक्षा केंद्र से बाहर निकले

कई छात्राएं समूह में बाहर निकलीं। कुछ अपने परिवार वालों के साथ चली गईं और कुछ सार्वजनिक परिवहन से घर जाने वाली थीं।

लेकिन छह छात्राओं का समूह इसके बाद अचानक गायब हो गया।

लापता छात्राएं कौन हैं

पुलिस रिकॉर्ड और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार लापता छात्राओं की उम्र लगभग 17 से 19 वर्ष के बीच है।

ये छात्राएं अलग-अलग गांवों की रहने वाली थीं लेकिन परीक्षा केंद्र पर उनकी आपस में पहचान थी।

इनमें शामिल हैं:

  • हीमपुर दीपा थाना क्षेत्र की छात्राएं
  • सियाउ क्षेत्र की छात्राएं
  • चांदपुर नगर क्षेत्र की छात्राएं

परिजनों का कहना है कि वे अक्सर परीक्षा देने या कोचिंग जाने के दौरान एक-दूसरे से मिलती थीं।

पहली चिंता: जब बेटियां घर नहीं लौटीं

परीक्षा के बाद सामान्यतः छात्राएं शाम तक घर पहुंच जाती हैं। लेकिन इस दिन ऐसा नहीं हुआ।

शाम 6 बजे के बाद जब कुछ परिवारों ने अपनी बेटियों को फोन किया तो कई मोबाइल फोन बंद मिले।

कुछ परिवारों ने सोचा कि शायद नेटवर्क की समस्या होगी या छात्राएं रास्ते में होंगी।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, चिंता बढ़ने लगी।

रात की तलाश: गांवों में बेचैनी

शाम से रात के बीच परिवारों ने अपनी-अपनी बेटियों की तलाश शुरू की।

उन्होंने:

  • सहेलियों के घर जाकर पूछताछ की
  • आसपास के बाजारों में खोजबीन की
  • बस स्टैंड और ऑटो स्टैंड पर जानकारी ली

लेकिन कहीं भी छात्राओं का पता नहीं चला।

पुलिस तक पहुंचा मामला

रात लगभग 10 बजे कई परिवार एक साथ चांदपुर थाने पहुंचे।

उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी बेटियां परीक्षा देने गई थीं और अब तक घर नहीं लौटी हैं।

शुरुआत में पुलिस ने सामान्य गुमशुदगी का मामला मानकर जानकारी दर्ज की।

लेकिन जब पता चला कि छह छात्राएं एक साथ गायब हैं, तो मामला गंभीर हो गया।

एफआईआर और जांच की शुरुआत

पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

प्रारंभिक जांच के तहत तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:

  1. परीक्षा केंद्र के आसपास की जांच
  2. सीसीटीवी फुटेज की जांच
  3. मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग

इसी दौरान जांच में पहला बड़ा सुराग सामने आया।

मोबाइल लोकेशन: हरिद्वार का संकेत

 

सर्विलांस टीम ने जब मोबाइल नंबरों को ट्रैक किया तो पता चला कि एक छात्रा के फोन की आखिरी लोकेशन उत्तराखंड के हरिद्वार क्षेत्र में मिली है।

यह जानकारी चौंकाने वाली थी क्योंकि बिजनौर से हरिद्वार लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा उत्तराखंड तक बढ़ा दिया।

मोबाइल फोन बंद: जांच में मुश्किल

लोकेशन मिलने के कुछ समय बाद ही सभी मोबाइल फोन बंद हो गए।

इससे पुलिस के लिए आगे की ट्रैकिंग मुश्किल हो गई।

अब पुलिस को:

  • सीसीटीवी फुटेज
  • बस और ट्रेन रिकॉर्ड
  • स्थानीय जानकारी

पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

क्या छात्राएं खुद गईं?

जांच का पहला एंगल यह है कि क्या छात्राएं स्वेच्छा से घर छोड़कर कहीं चली गईं

कुछ अधिकारियों का कहना है कि किशोर उम्र में कई बार भावनात्मक फैसले अचानक लिए जाते हैं।

संभावना है कि छात्राओं ने:

  • किसी दोस्त के साथ जाने का फैसला किया हो
  • किसी धार्मिक स्थल की यात्रा की हो
  • किसी निजी कारण से घर छोड़ा हो

हालांकि यह केवल अनुमान है।

अपहरण की आशंका

परिवारों का कहना है कि उनकी बेटियां बिना बताए घर छोड़कर नहीं जाएंगी।

उनका दावा है कि:

  • छह लड़कियों का एक साथ गायब होना सामान्य नहीं है
  • किसी व्यक्ति या गिरोह की भूमिका हो सकती है

इसी वजह से कुछ लोग इसे अपहरण का मामला मान रहे हैं।

मानव तस्करी का एंगल

विशेषज्ञों के अनुसार भारत के कई हिस्सों में किशोरियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले सामने आते रहे हैं।

ऐसे मामलों में:

  • नौकरी का लालच दिया जाता है
  • शादी का झांसा दिया जाता है
  • सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बनाया जाता है

हालांकि पुलिस ने अभी तक इस एंगल की पुष्टि नहीं की है।

सोशल मीडिया की भूमिका

आज के डिजिटल दौर में किशोर-किशोरियां सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं।

जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या छात्राओं का किसी अज्ञात व्यक्ति से ऑनलाइन संपर्क था।

इसके लिए पुलिस:

  • मोबाइल चैट रिकॉर्ड
  • सोशल मीडिया अकाउंट
  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड

की जांच कर रही है।

परीक्षा केंद्र की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है।

आम तौर पर बोर्ड परीक्षा के दौरान:

  • पुलिस तैनात रहती है
  • प्रवेश और निकास पर निगरानी होती है
  • बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित रहती है

फिर भी छात्राओं का अचानक गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है।

ग्रामीण समाज में असर

इस घटना का असर आसपास के गांवों में साफ दिखाई दे रहा है।

अभिभावक अब अपने बच्चों को अकेले भेजने में हिचक रहे हैं।

कुछ गांवों में लोगों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि:

  • छात्राएं समूह में ही यात्रा करेंगी
  • परिवार का कोई सदस्य उन्हें परीक्षा केंद्र तक छोड़ने जाएगा

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

जैसे-जैसे मामला मीडिया में आया, प्रशासन पर दबाव बढ़ने लगा।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की कि:

  • छात्राओं की जल्द बरामदगी हो
  • मामले की निष्पक्ष जांच हो

पुलिस की रणनीति

पुलिस ने मामले की जांच के लिए कई टीमें गठित की हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • स्थानीय थाना पुलिस
  • सर्विलांस टीम
  • स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG)

इन टीमों को अलग-अलग दिशाओं में जांच के लिए भेजा गया है।

संभावित मार्गों की जांच

पुलिस उन सभी संभावित रास्तों की जांच कर रही है जहां से छात्राएं जा सकती थीं।

जैसे:

  • चांदपुर बस स्टैंड
  • नजीबाबाद रोड
  • हरिद्वार हाईवे
  • रेलवे स्टेशन

सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में कई संभावनाएं हो सकती हैं:

  1. किशोर मानसिक दबाव
  2. पारिवारिक विवाद
  3. सोशल मीडिया प्रभाव
  4. किसी व्यक्ति के बहकावे में आना

लेकिन अंतिम निष्कर्ष केवल ठोस जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।

परिवारों की पीड़ा

छात्राओं के परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन है।

कई माता-पिता रातभर जागकर अपनी बेटियों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

एक पिता ने कहा:

“हमारी बेटी सुबह परीक्षा देने गई थी। हमें नहीं पता था कि शाम तक उसका कोई पता नहीं होगा।”

निष्कर्ष: अभी भी अनसुलझा रहस्य

बिजनौर की यह घटना अभी भी रहस्य बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है:

  • छह छात्राएं एक साथ कहां गईं?
  • क्या वे सुरक्षित हैं?
  • या फिर किसी साजिश का शिकार हो गईं?

जब तक छात्राओं का पता नहीं चलता, तब तक इन सवालों के जवाब मिलना मुश्किल है।

पूरे इलाके की निगाहें अब पुलिस की जांच और छात्राओं की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।

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