खनन विभाग में बड़ी कार्रवाई: सचिव माला श्रीवास्तव की सख्ती, दो खान अधिकारियों को मिली प्रतिकूल प्रविष्टि
लखनऊ | ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में अवैध खनन और राजस्व लक्ष्य में ढिलाई पर अब सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक श्रीमती माला श्रीवास्तव ने विभागीय कार्यों की समीक्षा के दौरान स्पष्ट कर दिया कि खनन कार्यों में शिथिलता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक में प्रदेश के सभी जनपदों में उपखनिजों के खनन, परिवहन, प्रवर्तन कार्रवाई और राजस्व प्राप्ति की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया गया। बैठक के दौरान कई जिलों में अपेक्षित परिणाम न मिलने पर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई।
समीक्षा बैठक में क्या कहा गया
सचिव माला श्रीवास्तव ने सभी जिला खनन अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि:
- अवैध खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी और कठोर कार्रवाई की जाए।
- खनन से जुड़े मामलों में नियमित प्रवर्तन अभियान चलाए जाएं।
- विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता या कार्य में शिथिलता पाए जाने पर कठोर विभागीय कार्रवाई तय है।
दो खान अधिकारियों पर गिरी गाज
समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ जिलों में राजस्व लक्ष्य के अनुरूप प्राप्ति नहीं हुई और प्रवर्तन कार्रवाई भी अपेक्षित स्तर पर नहीं रही।
इसी आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 की मध्यावधि समीक्षा में:
- बांदा के खान अधिकारी राज रंजन कुमार
- गोण्डा के खान अधिकारी अभय रंजन
को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) प्रदान की गई है। यह कार्रवाई विभागीय कार्यों में शिथिलता और निर्धारित लक्ष्य पूरा न करने के कारण की गई।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सख्ती
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश में रेत, गिट्टी, मोरंग जैसे उपखनिजों का खनन राज्य के लिए बड़ा राजस्व स्रोत है।
लेकिन कई जिलों में
- अवैध खनन
- ओवरलोडिंग
- बिना रॉयल्टी परिवहन
जैसी गतिविधियों के कारण सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है। ऐसे में शासन अब राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए विभागीय जवाबदेही तय कर रहा है।
शासन की प्राथमिकता क्या है
समीक्षा बैठक में सचिव माला श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि:
- खनन व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
- अवैध खनन के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जाएगा।
- राजस्व उन्मुख प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करते हुए राज्य की राजस्व प्राप्ति में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करें।
निष्कर्ष
खनन विभाग की इस सख्त समीक्षा के बाद साफ संकेत मिल गया है कि प्रदेश में अवैध खनन और राजस्व लक्ष्य में ढिलाई अब महंगी पड़ सकती है। शासन की मंशा स्पष्ट है—जवाबदेही तय होगी और लापरवाही पर सीधे कार्रवाई होगी।












