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‘एमडी’ का खेल और फर्जी अस्पताल! डॉक्टर की हत्या के बाद खुली बड़ी साजिश

नगीना हत्याकांड का बड़ा खुलासा: बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था शिवालय हेल्थ केयर सेंटर, जिले में अवैध अस्पतालों के नेटवर्क पर उठे सवाल

विशेष रिपोर्ट। अवनीश त्यागी 

नगीना (बिजनौर)। धामपुर मार्ग स्थित शिवालय हेल्थ केयर सेंटर के संचालक राजकुमार की गुरुवार शाम गोली मारकर हत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। लेकिन इस हत्या के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि यह अस्पताल कथित रूप से बिना पंजीकरण और बिना मान्यता प्राप्त चिकित्सक के सहारे पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से संचालित हो रहा था। अब इस मामले ने अवैध अस्पतालों के नेटवर्क और संभावित संरक्षण तंत्र को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Breaking Point: हत्या के बाद खुली अस्पताल की परतें

जांच के दौरान यह सामने आया कि अस्पताल के बाहर लगे फ्लेक्सी बोर्ड पर संचालक राजकुमार के नाम के आगे एमडी (बाल रोग विशेषज्ञ) लिखा हुआ था।

लेकिन अस्पताल परिसर में लगे दूसरे बोर्ड पर एमडी की फुल फॉर्म “मैनेजिंग डायरेक्टर” बताई गई है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि मरीजों को भ्रमित करने के लिए एमडी शब्द का इस्तेमाल किया गया

सामान्य तौर पर एमडी का अर्थ डॉक्टर ऑफ मेडिसिन होता है, जिससे आम लोग यह मान लेते हैं कि संबंधित व्यक्ति विशेषज्ञ चिकित्सक है।

मुख्य तथ्य 

  • शिवालय हेल्थ केयर सेंटर कथित रूप से बिना पंजीकरण के संचालित हो रहा था

  • लगभग डेढ़ साल से अस्पताल में इलाज किया जा रहा था

  • फ्लेक्सी बोर्ड पर एमडी बाल रोग विशेषज्ञ लिखकर मरीजों को आकर्षित किया जाता था

  •  दूसरे बोर्ड पर एमडी का अर्थ मैनेजिंग डायरेक्टर लिखा मिला

  •  अस्पताल के बोर्ड पर मेडिकल डिग्री या पंजीकरण संख्या का उल्लेख नहीं

  •  पहले भी यहां प्रसूता की मौत का मामला सामने आ चुका है

  •  तहसील के नोडल अधिकारी से पूछने पर पंजीकरण की जानकारी स्पष्ट नहीं मिली

प्रसूता की मौत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ समय पहले इसी अस्पताल में एक प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस घटना के बाद अस्पताल संचालक कुछ समय के लिए फरार भी बताया गया

इसके बावजूद अस्पताल के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों रही

जिले में अवैध अस्पतालों की ‘बाढ़’

स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय जानकारों का कहना है कि जनपद के कई कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के अवैध अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं

इनमें से कई जगहों पर अप्रशिक्षित लोग डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है।

अवैध उगाही और संरक्षण की चर्चा

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि इन अवैध अस्पतालों और छोलाछाप चिकित्सकों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक को है

कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिमाह लाखों रुपये की कथित अवैध उगाही के कारण ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह मामला अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है

स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच की मांग

सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग उठाई है।

लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अवैध अस्पतालों का पूरा नेटवर्क और उससे जुड़े संभावित संरक्षण तंत्र सामने आ सकता है

हत्या की जांच के साथ अस्पताल की वैधता भी जांच के दायरे में

पुलिस फिलहाल राजकुमार की हत्या के मामले की जांच में जुटी हुई है

लेकिन इस घटना के बाद अब यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अस्पताल की वैधता, संचालक की डिग्री और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली भी जांच के घेरे में आ गई है

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच व्यापक स्तर पर हुई तो जिले में संचालित कई अन्य अवैध अस्पतालों का भी खुलासा हो सकता है

निष्कर्ष

नगीना में हुई यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करने वाला मामला बनती जा रही है

यदि समय रहते अवैध अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो मरीजों की जान से खिलवाड़ का यह सिलसिला जारी रह सकता है

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