खरीफ सीजन से पहले सख्ती: नूरपुर में खाद दुकानों पर छापा, रिकॉर्ड गड़बड़ी में 4 फंसे

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बिजनौर/नूरपुर। खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों को समय पर और सही दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने सख्ती तेज कर दी है। बॉर्डर क्षेत्र नूरपुर में उर्वरक प्रतिष्ठानों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां सघन निरीक्षण के दौरान 4 खाद विक्रेताओं के अभिलेख अधूरे पाए जाने पर नोटिस और निलंबन की कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब खरीफ फसलों की बुवाई के लिए किसानों की खाद पर निर्भरता बढ़ रही है और कालाबाजारी, ओवररेटिंग तथा टैगिंग जैसी शिकायतें प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। प्रशासन का यह अभियान साफ संकेत दे रहा है कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।
नूरपुर क्षेत्र के खाद प्रतिष्ठानों पर चला जांच अभियान
22 अप्रैल 2026 को तहसील चांदपुर के नूरपुर बॉर्डर क्षेत्र में उर्वरक दुकानों का सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण टीम ने:
- देशराज खाद भंडार, सैदपुर माफी
- सैनी ट्रेडर्स, पूरनपुर नगला
- गायत्री ट्रेडर्स, पूरनपुर नगला
- चौहान ट्रेडर्स, गोहावर
- सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, नूरपुर
इन प्रतिष्ठानों की जांच की।
निरीक्षण के दौरान पॉस मशीन के स्टॉक का मिलान स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और कैश मेमो से किया गया, जिसमें चार प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। इसके बाद संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
किसानों को तय सीमा से अधिक खाद देने पर रोक
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी जोत और बुवाई के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
निर्धारित सीमा के अनुसार:
- 1 हेक्टेयर भूमि पर अधिकतम 07 बैग यूरिया
- 1 हेक्टेयर भूमि पर अधिकतम 05 बैग डीएपी
ही दिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कुछ बड़े खरीदार या कालाबाजारी करने वाले जरूरत से ज्यादा खाद खरीदकर कृत्रिम संकट पैदा न कर सकें, ताकि छोटे किसानों को समय पर खाद मिल सके।
ओवररेटिंग और टैगिंग पर प्रशासन की सख्त चेतावनी
निरीक्षण के दौरान खाद विक्रेताओं को कड़े निर्देश दिए गए कि:
- खाद की बिक्री बल्क में न की जाए
- किसान की खतौनी और फसलवार संस्तुति के आधार पर ही खाद दी जाए
- यूरिया-डीएपी के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग न हो
- निर्धारित दर से अधिक कीमत न वसूली जाए
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विक्रेता ओवररेटिंग या टैगिंग करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खरीफ सीजन में खाद उपलब्ध, फिर भी निगरानी क्यों जरूरी?
हालांकि प्रशासन का दावा है कि जनपद में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीके उपलब्ध है, लेकिन हर सीजन में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते ऐसे निरीक्षण न हों तो:
- किसानों को खाद महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती है
- जरूरतमंद किसानों तक खाद समय पर नहीं पहुंचती
- कालाबाजारी करने वाले बाजार में कृत्रिम संकट पैदा कर देते हैं
ऐसे में नूरपुर बॉर्डर क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सक्रियता और किसानों के हितों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
प्रशासन का संदेश: किसानों के हक पर डाका डालने वालों की खैर नहीं
इस अभियान के जरिए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि खाद वितरण में लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
खाद विक्रेताओं को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि:
- हर किसान को खाद की रसीद अनिवार्य रूप से दी जाए
- स्टॉक बोर्ड प्रतिदिन अपडेट किया जाए
यानी प्रशासन अब सिर्फ निरीक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में कड़े कदम उठा रहा है।
नूरपुर क्षेत्र में खाद विक्रेताओं पर हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हिस्से की खाद में गड़बड़ी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता बनाए रखने और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन की यह मुहिम किसानों के लिए राहतभरी साबित हो सकती है।
अगर ऐसे अभियान लगातार जारी रहे, तो किसानों को सही समय पर सही दर पर उर्वरक मिलने की व्यवस्था मजबूत होगी और खाद माफियाओं पर लगाम लग सकेगी।












