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बिजनौर में सरकारी दफ्तरों की हकीकत उजागर: औचक निरीक्षण में 18 में से 14 कर्मचारी नदारद, डीएम ने मांगा जवाब

बिजनौर में सरकारी दफ्तरों की हकीकत उजागर: औचक निरीक्षण में 18 में से 14 कर्मचारी नदारद, डीएम ने मांगा जवाब

बिजनौर, 13 फरवरी 2026 | डिजिटल डेस्क के लिए अवनीश त्यागी की स्पेशल विश्लेषणात्मक रिपोर्ट 
जनपद बिजनौर में सरकारी कार्यालयों की कार्यसंस्कृति पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। समय से दफ्तर पहुंचने और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से किए गए औचक निरीक्षण में बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां एक प्रमुख कार्यालय में दर्ज कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा अनुपस्थित मिला। इस पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश जारी किए हैं।

औचक निरीक्षण का आदेश, कड़ी कार्रवाई का संकेत

जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देशों पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने शुक्रवार सुबह विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण किया। उद्देश्य साफ था—समयपूर्वक उपस्थिति सुनिश्चित करना और शासकीय कामकाज में अनुशासन लाना

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बड़ी चूक

 

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह द्वारा प्रातः 10:00 बजे किए गए निरीक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

  • उपस्थिति पंजिका में कुल 18 कार्मिक दर्ज
  • मौके पर केवल 4 कर्मचारी उपस्थित
  • 14 कर्मचारी अनुपस्थित

यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन दर्शाती है, बल्कि शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

उपायुक्त उद्योग कार्यालय में भी अधूरी हाजिरी

अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अंशिका दीक्षित ने उपायुक्त उद्योग कार्यालय का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान:

  • 3 कर्मचारी उपस्थित मिले
  • 2 कर्मचारियों के स्वीकृत अवकाश की जानकारी दी गई, लेकिन अवकाश प्रार्थना पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया
  • अन्य कर्मचारी निरीक्षण के समय अनुपस्थित पाए गए

उपायुक्त उद्योग अमित कुमार सिंह ने दूरभाष पर बताया कि वे आईटीआई बिजनौर में चल रही विश्वकर्मा प्रशिक्षण योजना के निरीक्षण हेतु गए हुए हैं।

डीएम का सख्त संदेश: जवाबदेही तय होगी

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण प्राप्त कर शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। यह संकेत है कि आने वाले दिनों में कार्रवाई तेज हो सकती है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विश्लेषण: क्या बदलेगी सरकारी दफ्तरों की तस्वीर?

यह निरीक्षण केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • बार-बार अनुपस्थिति से जनसेवाएं प्रभावित होती हैं
  • जवाबदेही तय होने से कार्यसंस्कृति में सुधार संभव
  • डिजिटल उपस्थिति और नियमित निरीक्षण से पारदर्शिता बढ़ेगी

यदि ऐसे औचक निरीक्षण नियमित होते हैं, तो सरकारी कार्यालयों में समयपालन और कार्यकुशलता दोनों में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

बिजनौर में हुआ यह औचक निरीक्षण प्रशासन के सख्त तेवर और सुधारवादी रुख को दर्शाता है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि स्पष्टीकरण के बाद क्या ठोस कार्रवाई होती है और क्या इससे सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली में वास्तविक बदलाव आता है या नहीं।

डिजिटल न्यूज पोर्टल के लिए विशेष रिपोर्ट

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