UGC कानून के खिलाफ धामपुर में किसान सड़कों पर उतरे

भाकियू जनशक्ति का SDM कार्यालय पर प्रदर्शन, बोले– “यह कानून शिक्षा नहीं, भविष्य छीनेगा”
अवनीश त्यागी की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट
धामपुर (बिजनौर)।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए यूजीसी (UGC) कानून के खिलाफ देशभर में उठ रहा विरोध अब ग्रामीण इलाकों तक तेज़ी से फैलता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में भारतीय किसान यूनियन (जनशक्ति) के नेतृत्व में मंगलवार को धामपुर उप जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा, बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय को लेकर नई बहस को भी जन्म दिया।
किसानों के साथ अब शिक्षा का सवाल भी सड़कों पर
https://youtu.be/kJfgv-T1bjw
यूजीसी कानून के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, युवा और महिलाएं शामिल रहीं।
प्रदर्शन का नेतृत्व भाकियू जनशक्ति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप चौहान, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष कविता राणा और जिलाध्यक्ष मंजू देवी ने संयुक्त रूप से किया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाते हुए आरोप लगाया कि नया यूजीसी कानून—
- उच्च शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने की साजिश है
- किसान और मजदूर के बच्चों को शिक्षा से दूर करेगा
- ग्रामीण व पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद करेगा
- “यह कानून शिक्षा सुधार नहीं, सामाजिक असमानता बढ़ाने वाला”
सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप चौहान ने कहा—
“यूजीसी कानून के नाम पर सरकार शिक्षा को कॉरपोरेट के हवाले करना चाहती है। यह किसान, युवा और गरीब वर्ग के भविष्य पर सीधा हमला है।”
वक्ताओं का कहना था कि यदि यह कानून लागू हुआ तो सरकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज कमजोर होंगे और महंगी निजी शिक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन पुलिस क्षेत्राधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
भाकियू जनशक्ति ने साफ चेतावनी दी कि—
“यदि सरकार ने किसानों और छात्रों की आवाज़ नहीं सुनी, तो यह आंदोलन प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर और उग्र होगा।”
अन्य संगठनों का भी समर्थन
इस दौरान करणी सेना के जिला अध्यक्ष अजीत सिंह ने भी प्रदर्शन को समर्थन देते हुए कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी फैसले में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है UGC कानून का विरोध?
विशेषज्ञों के अनुसार, यूजीसी कानून को लेकर विरोध इसलिए तेज़ है क्योंकि—
- यह शिक्षा के केंद्रीकरण को बढ़ावा देता है
- राज्यों की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करता है
- सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है
ग्रामीण और किसान संगठनों का आंदोलन इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा अब केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
नुक्कड़ नाटक से यूजीसी कानून का विरोध
📍 रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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