70+ आयु वर्ग पर फोकस, एंबुलेंस पर सख्ती: क्या वाकई बदल पाएगा बिजनौर का स्वास्थ्य सिस्टम ?
(Ayushman Card | Ambulance 102-108 | Bijnor Health News)
डिजिटल डेस्क के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट
बिजनौर | 23 जनवरी 2026 |
बिजनौर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक सिर्फ एक औपचारिक समीक्षा नहीं रही, बल्कि इसमें नीतिगत सख्ती, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के संकेत साफ दिखाई दिए।
70 वर्ष से अधिक आयु वालों पर प्रशासन का बड़ा दांव
बैठक का सबसे अहम बिंदु रहा—
👉 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड अनिवार्य रूप से बनाए जाएं।
यह निर्देश अपने आप में संकेत देता है कि प्रशासन अब आंकड़ों से आगे बढ़कर वास्तविक लाभार्थियों तक योजना पहुंचाने की दिशा में गंभीर है।
हर सप्ताह बीपीएम और बीसीपीएम के साथ समीक्षा, गांव-शहर में विशेष कैंप—यह रणनीति बताती है कि अब लक्ष्य आधारित नहीं, परिणाम आधारित निगरानी होगी।
साथ ही, अपात्रों के कार्ड पर रोक का निर्देश यह भी दर्शाता है कि आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर प्रशासन की नजर सख्त हो चुकी है।
102-108 एंबुलेंस: सेवा या लापरवाही?
डीएम ने एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए दो टूक कहा—
👉 अनावश्यक देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि जमीनी स्तर पर 102 और 108 सेवाओं को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं। अब नोडल अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए वाहन चालकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जो संकेत देते हैं कि आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही पर ज़ीरो टॉलरेंस अपनाया जाएगा।
सीएचसी–पीएचसी की हकीकत पर सीधी चोट
जिला चिकित्सालय से लेकर सीएचसी/पीएचसी तक आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन अब सिर्फ योजनाओं की नहीं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर की जमीनी स्थिति को भी गंभीरता से ले रहा है।
- जीवन रक्षक दवाएं
- एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन
- आशाओं का भुगतान
- जननी सुरक्षा योजना का लाभ
इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग को अब “रिपोर्टिंग नहीं, रिजल्ट” देना होगा।
टीकाकरण और कुपोषण पर सतत निगरानी
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण व कुपोषण की जांच पर विशेष जोर यह संकेत देता है कि प्रशासन भविष्य की पीढ़ी के स्वास्थ्य को लेकर सजग है। यह पहल तभी प्रभावी होगी जब समीक्षा कागजों तक सीमित न रहकर फील्ड तक पहुंचे।
टीबी उन्मूलन में अच्छा कार्य, सम्मान भी
राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किया जाना यह बताता है कि प्रशासन सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि प्रोत्साहन की नीति भी अपना रहा है—जो किसी भी सिस्टम को बेहतर बनाने का मजबूत आधार है।
सिस्टम बदलेगा या फिर वही पुरानी कहानी ?
यह बैठक संकेत देती है कि बिजनौर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब मूड में है।
लेकिन असली परीक्षा होगी—
✔️ क्या आयुष्मान कार्ड वाकई जरूरतमंदों तक पहुंचेंगे?
✔️ क्या एंबुलेंस समय पर पहुंचेगी?
✔️ क्या सीएचसी–पीएचसी में सुविधाएं वास्तव में सुधरेंगी?
अगर इन निर्देशों पर ईमानदारी से अमल हुआ, तो बिजनौर एक मॉडल जिला बन सकता है।
अन्यथा, यह भी एक और “मीटिंग की खबर” बनकर रह जाएगी।
जिलाधिकारी जसजीत कौर की यह पहल साफ संदेश देती है—
👉 स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही अब नहीं चलेगी।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि ज़मीनी स्तर पर यह सख्ती कितनी असरदार साबित होती है।
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