पेंशन पुनरीक्षण नहीं, बढ़ा आक्रोश: 6 जनवरी को डीएम के जरिए पीएम तक पहुंचेगी आवाज
पेंशन पुनरीक्षण नहीं होने से नाराज़ इंजीनियर्स, क्लॉज F-03 और वित्त विधेयक 2025 पर जताया कड़ा विरोध
बिजनौर।
केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर जारी अधिसूचना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश ने वेतन आयोग के नोटिफिकेशन में पेंशनर्स से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी को गंभीर अन्याय बताते हुए आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है। संघ के आह्वान पर 6 जनवरी 2026 को प्रदेशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
भारत सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी की थी, लेकिन इसमें पेंशन पुनरीक्षण और अन्य पेंशनरी लाभों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया।
संघ का आरोप है कि—
- क्लॉज F–03 में पेंशन को गैर-अंशदायी और गैर-वित्त पोषित बताकर पेंशनर्स के अधिकार कमजोर किए गए हैं।
- वित्त विधेयक 2025 में तिथि के आधार पर पेंशनर्स के बीच भेदभाव करने वाले प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो समानता के सिद्धांत के विपरीत हैं।
6 जनवरी को डीएम के माध्यम से पीएम को ज्ञापन
संघ के जनपद सचिव अंकित कुमार कपासिया ने बताया कि बिजनौर जनपद के सभी सेवारत एवं सेवानिवृत्त सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स एकजुट होकर जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।
ज्ञापन में मांग की जाएगी कि—
- 8वें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
- पेंशनर्स के साथ किसी भी प्रकार का तिथि आधारित भेदभाव समाप्त किया जाए।
- पेंशन को सामाजिक सुरक्षा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए।
क्यों अहम है यह मुद्दा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशनर्स के हितों को नजरअंदाज किया गया, तो इससे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। यह मामला आने वाले समय में अन्य कर्मचारी संगठनों के लिए भी एक नजीर बन सकता है।
आगे क्या?
यदि सरकार ने समय रहते पेंशन से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है। 6 जनवरी का ध्यानाकर्षण कार्यक्रम इसी दिशा में पहला संगठित कदम माना जा रहा है।













