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घटतौली के आरोपों पर घिरी बरकातपुर शुगर मिल, प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह

घटतौली के आरोपों पर घिरी बरकातपुर शुगर मिल, प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह

मंडावर A और नांगल B क्रय केंद्र प्रकरण में FIR पर टालमटोल, गन्ना विभाग में विरोधाभासी बयान

विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट। अवनीश त्यागी
बिजनौर | 08 जनवरी 2026। बरकातपुर शुगर मिल के गन्ना क्रय केंद्र मंडावर A पर घटतौली के आरोपों ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक रूप ले लिया है। इससे पहले नांगल गन्ना क्रय केंद्र B पर भी घटतौली पकड़े जाने के बावजूद महीनों तक FIR दर्ज न होने का मामला सामने आ चुका है।
अब इन दोनों मामलों को जोड़कर देखा जाए तो गन्ना तौल व्यवस्था की पारदर्शिता और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

निरीक्षण में घटतौली का शक, लेकिन जाँच अधूरी

08 जनवरी 2026 को किसानों की शिकायत पर जब मंडावर A क्रय केंद्र का निरीक्षण किया गया, तो मौके पर गन्ने से भरी ट्रॉली मौजूद थी, लेकिन तौल क्लर्क और चौकीदार अनुपस्थित मिले
किसानों का आरोप है कि निरीक्षण से बचने के लिए तौल मशीन को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया और इसके बाद तौल इंचार्ज मौके से फरार हो गए।

FIR को लेकर गन्ना विभाग में विरोधाभास

घटतौली पकड़े जाने के बावजूद FIR दर्ज न होने पर जब सवाल उठे, तो चीनी उपायुक्त ने कहा—

“जिस निरीक्षक अधिकारी द्वारा घटतौली पकड़ी जाती है, FIR कराने की जिम्मेदारी उसी की होती है।”

हालांकि, विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि FIR संस्थागत और प्रशासनिक प्रक्रिया है, न कि किसी एक निरीक्षक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी।
इस बयान को जिम्मेदारी से बचने का प्रयास माना जा रहा है।

पूर्व मामला: नांगल B पर भी कार्रवाई शून्य

किसानों ने बताया कि नांगल गन्ना क्रय केंद्र B पर घटतौली पहले ही पकड़ी जा चुकी थी।
लिखित रिपोर्ट और विभागीय जानकारी होने के बावजूद महीनों बाद भी कोई FIR दर्ज नहीं की गई, जिससे गन्ना विभाग और बाट-माप निरीक्षकों की सांठगांठ के आरोप और मजबूत हो गए हैं।

मिल प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह

इस पूरे मामले पर चीनी मिल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए एकाधिक बार संपर्क किया गया,
लेकिन बरकातपुर शुगर मिल के महाप्रबंधक ने फोन रिसीव नहीं किया

मिल प्रबंधन की यह चुप्पी
✔️ आरोपों को और गंभीर बना रही है
✔️ किसानों के संदेह को मजबूत कर रही है
✔️ पारदर्शिता के दावों पर सवाल खड़े कर रही है

किसान यूनियन का आक्रोश: “चुप्पी ही सबसे बड़ा सबूत”

भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के जिलाध्यक्ष चौ. वीर सिंह सहरावत ने कहा—

“जब दो-दो क्रय केंद्रों पर घटतौली पकड़ी जाती है और
न FIR होती है, न मिल प्रबंधन सामने आता है,
तो यह साफ है कि पूरा तंत्र किसानों के खिलाफ खड़ा है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर मंडल और प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

अब तक क्या-क्या सामने आया?

  • ✔️ मंडावर A पर घटतौली का आरोप, जाँच अधूरी
  • ✔️ नांगल B पर घटतौली पहले पकड़ी जा चुकी
  • ❌ दोनों मामलों में FIR नहीं
  • ❓ गन्ना विभाग में विरोधाभासी बयान
  • मिल महाप्रबंधक का पक्ष सामने नहीं आया

👉 स्थिति: जवाबदेही तय नहीं, कार्रवाई लंबित

घटतौली पर FIR क्यों जरूरी?

  • यह आर्थिक अपराध है

  • किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान

  • FIR न होने से आरोपी बेखौफ

  • भ्रष्टाचार दोहराने का रास्ता साफ

WHY THIS MATTERS

किसानों के भरोसे और व्यवस्था दोनों पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक क्रय केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गन्ना तौल तंत्र की साख से जुड़ा है।
यदि समय रहते निष्पक्ष जाँच और FIR नहीं हुई, तो यह प्रकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े किसान आंदोलन की भूमिका बन सकता है।

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