Target Tv Live

मानवाधिकारों से समावेशी विकास तक: बिजनौर में NHRC सदस्य प्रियंक का स्पष्ट एजेंडा

बुजुर्ग बंदियों को आयुष्मान, अनाथ बच्चों को परिवार और योजनाओं में जीरो भेदभाव के निर्देश

बिजनौर | 07 जनवरी 2026
जनपद स्तर पर मानवाधिकारों को मजबूत करने और समावेशी विकास की अवधारणा को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से बुधवार को विकास भवन सभागार में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली के माननीय सदस्य प्रियंक कानूनगो ने की।

यह बैठक केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब मानवाधिकार सरकारी योजनाओं के केंद्र में होंगे, न कि केवल कागजों तक सीमित।

“अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचना ही असली विकास”

बैठक को संबोधित करते हुए NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि—

मानवाधिकारों का सम्मान और समावेशी विकास किसी भी समाज की प्रगति की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की पहुँच नहीं होगी, तब तक किसी भी विकास को संपूर्ण नहीं माना जा सकता। बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

70 वर्ष से अधिक आयु वालों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

बैठक में वरिष्ठ नागरिकों और बंदियों के अधिकारों पर विशेष फोकस देखने को मिला। NHRC सदस्य ने निर्देश दिए कि—

  • जिला कारागार में निरुद्ध 70 वर्ष से अधिक आयु के बंदियों को अनिवार्य रूप से आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए।
  • वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन के 70 वर्ष पूर्ण कर चुके सभी पात्र लाभार्थियों को भी आयुष्मान योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्र या परिस्थिति के कारण किसी को इलाज से वंचित रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

अनाथ बच्चों के लिए परिवार सुनिश्चित करने पर जोर

बाल अधिकारों को लेकर बैठक में संवेदनशील रुख देखने को मिला।
NHRC सदस्य ने किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि—

  • ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता ज्ञात नहीं हैं
  • या जो पूर्णतः अनाथ हैं

उनके लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद दिलाने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी पारिवारिक वातावरण मिल सके।

महिलाएं, बच्चे, दिव्यांग और कमजोर वर्ग प्राथमिकता में

प्रियंक कानूनगो ने कहा कि समावेशी विकास का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की स्थापना भी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—

  • महिलाओं
  • बच्चों
  • दिव्यांगों
  • आर्थिक रूप से पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों

के अधिकारों की रक्षा को सभी योजनाओं की मुख्य धुरी बनाया जाए।

मानवाधिकार जागरूकता ज़मीनी स्तर तक

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि—

  • जमीनी स्तर पर मानवाधिकार जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं
  • विभागीय कार्यशालाओं के माध्यम से कर्मचारियों और आम जनता को अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए
  • सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से पात्र व्यक्तियों तक पहुँचाया जाए

ताकि कोई भी व्यक्ति जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित न रहे।

इन विभागों की हुई बिंदुवार समीक्षा

NHRC सदस्य द्वारा निम्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई—

  • महिला कल्याण विभाग
  • किशोर न्याय बोर्ड
  • बाल कल्याण समिति
  • एएचटीयू (Anti Human Trafficking Unit)
  • जिला कारागार
  • अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
  • समाज कल्याण विभाग
  • जिला पंचायत राज विभाग
  • सहकारिता विभाग
  • बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग
  • महिला एवं बाल विकास विभाग

सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

इस अवसर पर—

  • अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वान्या सिंह
  • परियोजना निदेशक, DRDA दिनकर भारती
  • जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता
  • जिला प्रोबेशन अधिकारी सौरभ कुमार
  • सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्यों अहम है यह बैठक?

यह बैठक संकेत देती है कि मानवाधिकार अब केवल नीतिगत चर्चा नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बन रहे हैं।
यदि दिए गए निर्देशों पर प्रभावी अमल होता है, तो बिजनौर जनपद मानवाधिकार-संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण बन सकता है।

Tags

#NHRC #HumanRights #InclusiveDevelopment #BijnorNews #AyushmanBharat #ChildAdoption #WomenRights #DivyangRights #SocialJustice #UPNews #GoogleNewsApproved

Leave a Comment

यह भी पढ़ें