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“विधि शिक्षा केवल करियर नहीं, राष्ट्र सेवा का माध्यम बने” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

“कानून का उद्देश्य न्याय के साथ मानवता की सेवा है”
लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ — “संविधान की आत्मा को जीवन में उतारें”

📍 स्थान: डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ
📅 दिनांक: 2 नवंबर 2025
🕙 समय: प्रातः 10:00 बजे
🎙️ अध्यक्षता: मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ
👤 मुख्य अतिथि: न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय
💼 विशिष्ट अतिथि: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं अरुण भंसाली

📺 लाइव प्रसारण: YouTube Live लिंक

“विधि शिक्षा केवल करियर नहीं, राष्ट्र सेवा का माध्यम बने” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आज प्रेक्षागृह में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ।
समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की और मुख्य अतिथि के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा —

“विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी या पेशा नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना और मानवता की सेवा है। कानून तब जीवंत होता है जब वह समाज में न्याय और समानता को मजबूत करता है।”

“कानून और नैतिकता का मेल ही न्याय की आत्मा है” — न्यायमूर्ति सूर्यकांत

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक अच्छे वकील या न्यायाधीश के लिए ‘नैतिकता, सहानुभूति और विवेक’ सर्वोपरि हैं।
उन्होंने कहा कि युवा विधिवेत्ताओं को तकनीकी समझ के साथ संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था आमजन के और करीब आए।

“कानून का अर्थ केवल धाराएं नहीं, बल्कि समाज की आत्मा और नागरिकों की उम्मीदें भी हैं।”

दीक्षांत समारोह में सम्मान और उपलब्धियों की झलक

कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. अजय कुमार ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
गोल्ड मेडल और मेरिट अवॉर्ड प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री और अतिथियों ने सम्मानित किया।
छात्रों के चेहरों पर जहाँ सफलता की खुशी थी, वहीं भविष्य के दायित्वों का भाव भी झलक रहा था।

योगी आदित्यनाथ का संदेश: “संविधान हमारी जीवन-पद्धति का आधार बने”

मुख्यमंत्री ने कहा —

“भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा है। हमें इसके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना होगा। न्यायपालिका और वकीलों का कार्य सिर्फ निर्णय देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाना भी है।”

उन्होंने युवा पीढ़ी से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि विधि शिक्षा के साथ ‘संवेदना और समर्पण’ की भावना ही न्याय के आदर्श को पूर्ण करती है।

विश्लेषणात्मक दृष्टि

यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह “न्याय, राष्ट्र और नवयुवक” के संवाद का सशक्त मंच बना।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विचारों ने कानून के छात्रों के भीतर “कर्तव्य और चरित्र” के बोध को गहराया।

मुख्य संदेश:

  • विधि शिक्षा का मकसद केवल ज्ञान नहीं, जिम्मेदारी भी है।
  • संविधान को व्यवहार में लाना ही सच्ची देशभक्ति है।
  • न्यायपालिका में नैतिकता और पारदर्शिता का समावेश समय की मांग है।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रेरक संबोधन
  • न्यायमूर्ति सूर्यकांत का विचारोत्तेजक भाषण
  • न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं अरुण भंसाली की गरिमामयी उपस्थिति
  • विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक वितरण
  • विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण

💬 निष्कर्ष

डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह इस बात का प्रतीक रहा कि भारत का विधि तंत्र अब केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं —
बल्कि यह समाज में न्याय, नैतिकता और मानवता के नए अध्याय लिखने की दिशा में अग्रसर है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में —

“कानून तभी सार्थक है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाए।”

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