बिजली कर्मियों और किसानों का बड़ा ऐलान — निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष की तैयारी!
लखनऊ में शैलेन्द्र दुबे और डॉ. दर्शन पाल की रणनीतिक बैठक | 03 नवम्बर को मुंबई में तय होगा आंदोलन का रोडमैप | बोले – “किसानों को अंधेरे में धकेलने की साजिश बर्दाश्त नहीं”
📍 लखनऊ, 2 नवम्बर 2025 | संवाददाता रिपोर्ट
देश के बिजली कर्मी और किसान एक बार फिर सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और संयुक्त किसान मोर्चा ने मिलकर घोषणा की है कि वे बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे।
राजधानी लखनऊ के चिनहट में हुई एक अहम बैठक में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन एवं संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल ने मंच से संयुक्त रूप से कहा —
“यह बिल किसानों और आम जनता के खिलाफ सीधा हमला है। सरकार बिजली को कॉरपोरेट घरानों के हाथों सौंपना चाहती है, जिससे गरीब और किसान फिर से लालटेन युग में लौट जाएंगे।”
03 नवम्बर को मुंबई में बनेगी आंदोलन की रूपरेखा
शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 03 नवम्बर को मुंबई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
इस बैठक में देशभर के बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के प्रमुख संगठन शामिल होंगे, जिनमें—
- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन
- ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन
- इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया
- इंडियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन
- ऑल इंडिया पावर मेंस फेडरेशन
जैसे प्रमुख संगठन शामिल रहेंगे।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ बिजली कर्मियों का नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं का संयुक्त आंदोलन होगा जो पूरे देश में एक स्वर में गूंजेगा।
“किसानों को देना होगा 12 हजार रुपये महीना बिजली बिल!”
शैलेन्द्र दुबे ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के प्रावधानों को जनता के लिए “विनाशकारी” बताते हुए कहा —
“इस बिल के तहत बिजली का कॉस्ट रिफ्लेक्टिव टैरिफ लागू किया जाएगा, यानी अब किसी उपभोक्ता को लागत मूल्य से कम दर पर बिजली नहीं मिलेगी। इसका सीधा असर किसानों और गरीबों पर पड़ेगा।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,
“7.5 हॉर्स पावर के ट्यूबवेल का मासिक बिल करीब 12,000 रुपये तक पहुंचेगा। यह वहन करना किसानों के बस की बात नहीं। इससे कृषि लागत बढ़ेगी, उत्पादन घटेगा और किसान कर्ज के जाल में फंसेंगे।”
“सरकार ने तोड़ा किसानों से किया वादा” — डॉ. दर्शन पाल
संयुक्त किसान मोर्चा की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक में डॉ. दर्शन पाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, 9 दिसम्बर 2021 के किसान समझौते का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने कहा,
“केंद्र सरकार ने उस समय लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि संयुक्त किसान मोर्चा की सहमति के बिना यह बिल नहीं लाया जाएगा। लेकिन अब इसे एकतरफा जारी करना किसानों के साथ विश्वासघात है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने यह बिल वापस नहीं लिया तो किसान फिर से दिल्ली कूच करने से पीछे नहीं हटेंगे।
“बिजली क्षेत्र को पूंजीपतियों के हवाले करने की कोशिश”
संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट है —
“सरकार सार्वजनिक संपत्ति को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करना चाहती है। बिजली जैसी आवश्यक सेवा को निजी हाथों में देना जनता के हित में नहीं है। इससे बिजली दरें आसमान छुएंगी और लाखों कर्मचारी असुरक्षा में जीने को मजबूर होंगे।”
उन्होंने कहा कि “देश के बिजली कर्मी, किसान और मजदूर अब एकजुट होकर इस नीतिगत आक्रमण का प्रतिरोध करेंगे।”
“यह संघर्ष सिर्फ बिजली का नहीं, अस्तित्व का सवाल है”
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी बिल या नीति के विरोध का नहीं, बल्कि “आम आदमी के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा” का सवाल है।
“सरकारें बदलती हैं, लेकिन नीति वही रहती है — निजीकरण की। अब देश की जनता को फैसला करना होगा कि वह बिजली को हक समझे या मुनाफे का सौदा।”
मुंबई से उठेगी चिंगारी, देशभर में जलेगी मशाल
बिजली कर्मियों और किसानों के इस गठबंधन ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मुंबई में 3 नवम्बर को बनने वाली रणनीति के बाद देश के हर राज्य में यह आंदोलन नए रूप में फैल सकता है।
संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने पीछे हटने से इनकार किया, तो आंदोलन का रूप जनक्रांति में बदलेगा।
📞 संपर्क:
शैलेन्द्र दुबे, संयोजक
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश
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