NDA ने भी WJI Bihar की दो बड़ी मांगें अपने मैनिफेस्टो में शामिल कीं
पत्रकारों को मिलेगी असामयिक मृत्यु पर आर्थिक सहायता, बिहार में खुलेगा पत्रकारिता विश्वविद्यालय — मीडिया जगत में खुशी की लहर
पटना से रवि कुमार की रिपोर्ट
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज़ आखिरकार सत्ता के गलियारों तक पहुंच गई है। बिहार की राजनीति में इस बार पत्रकार हित पहली बार बड़े चुनावी मुद्दे के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया, बिहार स्टेट यूनिट (WJI, Bihar) की पहल पर एनडीए गठबंधन ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पत्रकारों की दो महत्वपूर्ण मांगों को शामिल किया है।
🔹 WJI Bihar की मांगों को मिला मैनिफेस्टो में स्थान
पत्रकारों की दशा और सुरक्षा को लेकर लंबे समय से आवाज़ उठाने वाली WJI Bihar की दो मांगें अब एनडीए के चुनावी वादों में शामिल हैं —
1️⃣ किसी पत्रकार की असामयिक मृत्यु पर उसके परिजनों को एकमुश्त आर्थिक सहायता —
अब अगर किसी पत्रकार की ड्यूटी के दौरान या असामयिक मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को सरकार की ओर से सम्मानजनक आर्थिक सहयोग मिलेगा।
2️⃣ बिहार में पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना —
मध्यप्रदेश की तर्ज पर अब बिहार में भी पत्रकारिता विश्वविद्यालय खोला जाएगा, जिससे युवा पत्रकारों को आधुनिक पत्रकारिता की उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण मिलेगा।
महिला पत्रकारों को भी मिला स्थान
WJI Bihar की एक अन्य मांग — महिला पत्रकारों को हर माह दो दिन का विशेष अवकाश — को भी NDA ने एक नए रूप में स्वीकार किया है।
घोषणापत्र में कहा गया है कि “नई महिला पत्रकारों को मासिक वित्तीय सहायता” प्रदान की जाएगी।
यह निर्णय महिला पत्रकारों के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
पहले महागठबंधन ने भी जताया था समर्थन
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले महागठबंधन (RJD-कांग्रेस गठबंधन) ने भी अपने घोषणापत्र में पत्रकारों की दो मांगों को शामिल किया था —
- हर प्रमंडल मुख्यालय में प्रेस क्लब की स्थापना, ताकि पत्रकारों को कार्यस्थल और संवाद मंच मिल सके।
- पत्रकारों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना, जिससे उन्हें बेहतर चिकित्सा सुरक्षा मिल सके।
इस तरह अब सत्ता के दोनों प्रमुख गठबंधन — एनडीए और महागठबंधन, दोनों ने पत्रकार हितों को अपने-अपने घोषणापत्र का हिस्सा बनाया है।
यानी इस बार बिहार के चुनाव में “पत्रकार” भी बन गए हैं एक प्रमुख मतदाता वर्ग और नीति केंद्र।
“यह सिर्फ मांग नहीं, पत्रकार सम्मान की जीत है” — WJI Bihar
वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया, बिहार यूनिट के अध्यक्ष भोला नाथ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
“हमारी वर्षों की मेहनत और एकजुटता रंग लाई है। महागठबंधन और एनडीए दोनों ने हमारी मांगों पर ध्यान दिया है। यह पत्रकारों की आवाज़ की जीत है, अब यह मुद्दा सिर्फ मीडिया का नहीं बल्कि समाज के सम्मान का बन गया है।”
उन्होंने कहा कि यह पहली बार हुआ है जब पत्रकारों की मांगों को राजनीतिक घोषणापत्रों में औपचारिक मान्यता मिली है।
उपाध्यक्ष प्रवीण बागी और केके लाल ने कहा —
“यह ऐतिहासिक है कि बिहार के पत्रकार संगठन ने एक ऐसी पहल की, जिसे राजनीतिक दलों ने गंभीरता से लिया। अब जरूरत है कि चुनाव के बाद इन वादों को धरातल पर उतारा जाए।”
विश्लेषण: पत्रकार अब बने “नीति निर्धारक शक्ति”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पत्रकारों का यह दबाव लोकतंत्र की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।
- ✅ राजनीतिक दृष्टि से: अब पत्रकार केवल सूचना देने वाले नहीं, बल्कि नीति को प्रभावित करने वाले समूह के रूप में देखे जा रहे हैं।
- ✅ सामाजिक दृष्टि से: असामयिक मृत्यु पर सहायता और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाएं पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाएंगी।
- ✅ शैक्षणिक दृष्टि से: पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना से बिहार राष्ट्रीय मीडिया शिक्षा का नया केंद्र बन सकता है।
WJI Bihar की 8 सूत्री मांगों में शामिल प्रमुख बिंदु
- पत्रकारों की सुरक्षा और बीमा कवरेज।
- महिला पत्रकारों के लिए विशेष अवकाश और सुरक्षा प्रोटोकॉल।
- प्रेस क्लबों की स्थापना।
- पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना।
- पत्रकारों के परिवारों को सहायता योजना।
- मीडिया ट्रायल और फेक न्यूज पर सख्त कानून।
जनता की राय
सोशल मीडिया पर इस कदम का व्यापक स्वागत हो रहा है। कई वरिष्ठ पत्रकारों और नागरिकों ने इसे “लोकतंत्र की आत्मा की जीत” बताया है।
ट्विटर (X) पर ट्रेंड चल रहा है —
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निष्कर्ष
बिहार की चुनावी राजनीति में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है।
जहां अब तक किसान, शिक्षक या बेरोजगारी जैसे मुद्दे छाए रहते थे, वहीं इस बार पत्रकारों के हित और सुरक्षा भी केंद्र में हैं।
वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया, बिहार यूनिट की यह पहल न सिर्फ राज्य में बल्कि पूरे देश में मीडिया के आत्मसम्मान को एक नई पहचान दे रही है।
यह सिर्फ चुनावी वादा नहीं — यह पत्रकारिता की गरिमा, सुरक्षा और भविष्य का सवाल है।











