विदुर कुटी में कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेला: आस्था, सुरक्षा और संस्कृति का संगम
डीएम जसजीत कौर ने की व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा — कहा, “श्रद्धालु आएं, आस्था में डूबें, पर असुविधा का अनुभव न हो”
बिजनौर, 28 अक्टूबर 2025 | विशेष संवाददाता रिपोर्ट
पवित्र विदुर कुटी गंगा घाट एक बार फिर तैयार है— आस्था की उस विराट लहर का साक्षी बनने के लिए, जो कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान पर उमड़ती है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले, जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने मेले की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि “इस बार का मेला प्रशासनिक अनुशासन, स्वच्छता और संस्कृति का आदर्श उदाहरण बने।”
🔷 डीएम जसजीत कौर की सख्त हिदायतें — “आस्था के साथ अनुशासन भी ज़रूरी”

विदुर कुटी स्थित पुस्तकालय में आयोजित बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मेले के सभी प्रमुख पहलुओं पर समीक्षा की। उन्होंने कहा कि
“मेले में आने वाला हर श्रद्धालु हमारा अतिथि है। उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🔹 सुरक्षा व्यवस्था होगी फुलप्रूफ — एनडीआरएफ, गोताखोर और कैमरे तैनात
डीएम ने कहा कि मेले में सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।
- हर मुख्य स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
- वॉच टावर और सर्च लाइट से निगरानी होगी।
- एनडीआरएफ टीम, गोताखोरों और अग्निशमन बल की तैनाती रहेगी।
- पुलिस बल को राउंड-द-क्लॉक मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
“श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी — चाहे दिन हो या रात,” डीएम ने दो टूक कहा।
24 घंटे चलने वाला अस्थाई अस्पताल — आपात स्थिति में तत्पर चिकित्सा टीम
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि मेला क्षेत्र में पांच बिस्तरों का अस्थाई अस्पताल बनाया गया है, जो 24 घंटे चालू रहेगा।
- अस्पताल में चिकित्सक और नर्सों की पूरी टीम तैनात रहेगी।
- हर समय एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी।
- स्वास्थ्य विभाग को आदेश है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत रिस्पॉन्स दिया जाए।
स्वच्छता पर सख्त निगरानी — पॉलिथीन पर पूरी तरह प्रतिबंध
जिलाधिकारी ने कहा कि मेला स्थल पर पॉलिथीन का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
- नगर पालिका व पंचायत राज विभाग को कूड़ेदान की पर्याप्त संख्या लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्वच्छता कर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर रहेंगे ताकि मेले में गंदगी न फैले।
- जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के संदेशों से युक्त “ग्रीन जोन” बनाने की भी योजना है।
यातायात प्रबंधन पर भी फोकस — श्रद्धालुओं को न हो असुविधा
डीएम ने बताया कि इस बार यातायात व्यवस्था को स्मार्ट ट्रैफिक मॉडल के तहत तैयार किया गया है।
- मेले में जाने और निकलने के एक-तरफा रूट निर्धारित किए जा रहे हैं।
- बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड्स से रास्ता स्पष्ट रहेगा।
- ट्रैफिक पुलिस को चौबीसों घंटे गश्त के आदेश दिए गए हैं।
स्थानीय संस्कृति को मिलेगी मंच — “अपनी धरती के कलाकार चमकेंगे”
मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोककलाकारों और पारंपरिक विधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
डीएम ने कहा —
“यह मेला केवल स्नान नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी की खुशबू और लोकसंस्कृति का उत्सव है। इसलिए मंच उन्हीं कलाकारों को मिलेगा, जिनके गीतों में गंगा बहती है और जिनकी कला में प्रदेश की आत्मा बसती है।”
इस बार मंचों पर बिजनौर की लोकनृत्य, भजन मंडलियां, कवि सम्मेलन और लोकगीत समूह अपनी प्रस्तुति देंगे।
शिकायत एवं खोया-पाया केंद्र — 24 घंटे सेवा
श्रद्धालुओं की मदद के लिए शिकायत केंद्र और खोया-पाया केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
- यह केंद्र दिन-रात खुले रहेंगे।
- वहां पर प्रशिक्षित कर्मी हर शिकायत का तत्काल समाधान करेंगे।
साकेंद्र प्रताप चौधरी ने कहा — “यह तंबुओं का शहर हमारी तहजीब की मिसाल है”
जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप चौधरी ने कहा कि
“गंगा तट का यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत झांकी है। यहां हर तबके का व्यक्ति एक साथ बैठता है, यही इसकी खूबसूरती है।”
उन्होंने कहा कि लाखों लोग हर साल यहां तंबू लगाकर गंगा किनारे डेरा डालते हैं — इसीलिए इसे “तंबुओं का शहर” कहा जाता है।
डीएम की अपील — “श्रद्धा के साथ स्वच्छता का संकल्प भी लें”
जिलाधिकारी ने अंत में कहा —
“यह मेला हमारी आस्था का प्रतीक है। लेकिन गंगा मां को स्वच्छ रखना भी हमारा धर्म है। मैं सभी श्रद्धालुओं से आग्रह करती हूं कि गंगा स्नान के साथ स्वच्छता का संकल्प भी अवश्य लें।”
📍 उपस्थित रहे ये अधिकारी
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह,
एसडीएम रितु चौधरी,
अपर मुख्य अधिकारी विकास मिश्रा,
सिंचाई, स्वास्थ्य, पुलिस, पंचायतराज विभाग के अधिकारी,
जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
इस बार का कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं,
बल्कि “सुरक्षा, स्वच्छता और संस्कृति” का जीवंत संगम बनने जा रहा है।
विदुर कुटी की पवित्र धरा पर जब लाखों आस्थावान डुबकी लगाएंगे,
तो उनके साथ प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी की गहराई में उतरता दिखेगा।
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