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“सिख परंपरा – सनातन संस्कृति का अविनाशी सेतु”

गुरु चरणों की पावन परंपरा में लखनऊ हुआ धन्य: मुख्यमंत्री योगी ने ‘जोड़ा साहिब यात्रा’ में किया सहभागी, बोले – जहां गुरु चरण पड़ते हैं, वहीं बसता रामराज्य

सिख गुरुओं का भारत की सनातन परंपरा में योगदान अविस्मरणीय, उनके त्याग की कथा पीढ़ियों को देती है प्रेरणा

📍 लखनऊ, 28 अक्टूबर 2025 | विशेष संवाददाता

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज आध्यात्मिक भक्ति, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के रंगों में रंगी दिखाई दी। शहर की गलियों में श्रद्धा का समंदर उमड़ पड़ा जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं पवित्र ‘गुरु चरण (जोड़ा साहिब) यात्रा’ में सहभाग कर श्री गुरुग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और पंच प्यारे को सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री का भावपूर्ण संबोधन न केवल सिख धर्म के प्रति आदर का प्रतीक था, बल्कि भारत की सनातन आत्मा से उस अदृश्य सूत्र का भी स्मरण था जो देश को एक करता है।

“जहां गुरु चरण पड़ते हैं, वहीं बसता है रामराज्य” — योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धा से नमन करते हुए कहा —

जित्थे जाहे बहे मेरा सतगुरु सो थान सुहावा रामराजे, अर्थात जहां गुरु महाराज के पावन चरण पड़ते हैं, वह स्थान रामराज्य की तरह पवित्र हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि यह हम सभी का परम सौभाग्य है कि आज हमें साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और माता साहिब कौर जी की पावन चरण पादुका के दर्शन करने का अवसर मिला है।
उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2025, गुरु तेग बहादुर जी महाराज के शहीदी के 350 वर्ष पूर्ण होने का ऐतिहासिक अवसर भी है — एक ऐसा अवसर, जो हमें त्याग, धर्मरक्षा और एकता की प्रेरणा देता है।

सिख गुरुओं का सनातन योगदान – एक अटूट सांस्कृतिक सूत्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं का योगदान भारत की सनातन परंपरा में अविस्मरणीय और अभिनंदनीय है।
उन्होंने भावुकता से कहा —

“गुरु नानक देव जी महाराज से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और उनके साहिबजादों का बलिदान भारतीय इतिहास में अमर है। उनका जीवन त्याग, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण का आदर्श है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक एकता का उत्सव है — एक ऐसी यात्रा जो देश के प्रत्येक नागरिक में अपनी परंपरा के प्रति गर्व और आस्था का संचार करती है।

यहियागंज गुरुद्वारा बना आस्था का केंद्र

पवित्र यात्रा जब यहियागंज गुरुद्वारा पहुँची, तो पूरा परिसर ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ के जयकारों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री योगी ने इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे के महत्व पर कहा —

“यह गुरुद्वारा हमारे लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। यहां गुरु तेग बहादुर जी महाराज और गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की अमिट स्मृतियाँ अंकित हैं। यह स्थल हमारी साझा विरासत का प्रतीक है।”

यात्रा का आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व

  • यह यात्रा दिल्ली से आरंभ होकर पटना साहिब तक जाएगी — जहां गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का जन्म हुआ था।
  • यात्रा के दौरान देशभर में एकता, श्रद्धा और भक्ति का वातावरण दिखाई दे रहा है।
  • यात्रा का उद्देश्य गुरु परंपरा की उस त्यागमयी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है जो न केवल सिख धर्म बल्कि पूरे भारत की आत्मा में रची-बसी है।
  • हर स्थान पर यात्रा का स्वागत फूलों, भजन-कीर्तन और आरती के साथ किया जा रहा है।

कार्यक्रम में रहे गणमान्य अतिथि

इस ऐतिहासिक अवसर पर सिख समुदाय और शासन-प्रशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मंच पर उपस्थित प्रमुख अतिथियों में थे —

  • श्री हरदीप सिंह पुरी, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री
  • श्री सुरेश खन्ना, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री, उत्तर प्रदेश
  • श्री बलदेव सिंह ओलख, कृषि राज्यमंत्री
  • सरदार परविन्दर सिंह, सदस्य, अल्पसंख्यक आयोग

इन सभी ने गुरु परंपरा के प्रति अपने विचार रखे और कहा कि सिख गुरुओं की शिक्षाएं आज भी समाज को सेवा, त्याग और एकता का मार्ग दिखा रही हैं।
गुरुद्वारा कमेटी के पदाधिकारीगण, सिख समाज के श्रद्धालु और अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

गुरु परंपरा की प्रेरणा – वर्तमान से भविष्य तक

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सिख गुरुओं के बलिदान की कथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की प्रेरणा है।

“गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश दिया, और गुरु गोबिंद सिंह जी ने साहिबजादों के बलिदान से राष्ट्र की आत्मा को अमरता प्रदान की। यह परंपरा हर भारतीय के हृदय में जीवित है।”

उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का आदर्श समाज को यह सिखाता है कि धर्म रक्षा, समरसता और कर्तव्य पालन ही सच्ची देशभक्ति है

समापन: श्रद्धा और एकता का संगम

‘पवित्र गुरु चरण यात्रा’ ने लखनऊ में केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और मानवीय मूल्यों का उत्सव रचा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सहभाग इस बात का संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश केवल भूगोल नहीं, बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक है।
यह यात्रा उस संदेश को दोहराती है —

“धर्म, त्याग और प्रेम ही भारत की आत्मा है; और वही आत्मा गुरु परंपरा से आज भी प्रकाशित हो रही है।

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