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पत्रकारों का संगठित आक्रोश: साथी की हत्या और तिगरी मेले में उपेक्षा के विरोध में भड़का मीडिया समुदाय, कवरेज के बहिष्कार का ऐलान

पत्रकारों का संगठित आक्रोश: साथी की हत्या और तिगरी मेले में उपेक्षा के विरोध में भड़का मीडिया समुदाय, कवरेज के बहिष्कार का ऐलान

डीएम निधि गुप्ता वत्स से मुलाकात में रखी गईं सशक्त मांगें — एसआईटी जांच, पत्रकार सुरक्षा कानून, और मीडिया सेंटर में सुविधाओं की गुहार

अमरोहा, 28 अक्टूबर।
प्रदेश में पत्रकारों का गुस्सा इस समय चरम पर है। प्रयागराज में वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मण नारायण सिंह (लक्ष्मण सिंह) की निर्मम हत्या के बाद पूरे राज्य का मीडिया जगत सन्न है। इस घटना ने पत्रकार सुरक्षा की गंभीर खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
इसी क्रम में अमरोहा जिले के पत्रकारों ने आज जिलाधिकारी श्रीमती निधि गुप्ता वत्स से मुलाकात कर दो टूक कहा — “अब खामोशी नहीं चलेगी।”

पत्रकारों ने डीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सरकार को अब यह समझना होगा कि पत्रकार केवल खबरें नहीं लिखते, बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूती देते हैं। अगर पत्रकार असुरक्षित हैं, तो सच का आईना भी धुंधला पड़ जाएगा।

प्रयागराज में पत्रकार की हत्या ने हिला दिया प्रदेश:

मंगलवार को प्रयागराज में वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मण नारायण सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे अपने निर्भीक, निष्पक्ष और जनपक्षधर पत्रकारिता के लिए प्रसिद्ध थे।
इस जघन्य हत्या से पूरे पत्रकार समाज में आक्रोश फैल गया।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि प्रशासन ने भले ही एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया हो, परंतु यह पर्याप्त नहीं है —
“हम निष्पक्ष और उच्च स्तरीय एसआईटी जांच चाहते हैं ताकि कोई निर्दोष न फँसे और असली गुनहगार सजा पाए।”

पत्रकारों की एकजुट मांगें — “सिर्फ संवेदना नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए”

पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने डीएम से मुलाकात के दौरान निम्न प्रमुख मांगें रखीं:

  1. वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मण नारायण सिंह हत्या कांड की एसआईटी जांच तत्काल गठित की जाए।
  2. निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्चाधिकारी को जांच की निगरानी सौंपी जाए।
  3. प्रदेश में तत्काल ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ लागू किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
  4. जिला स्तर पर पत्रकार सुरक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना की जाए, जो किसी आपात स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान करे।
  5. पत्रकार हत्या मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
  6. तिगरी गंगा मेले में मीडिया कर्मियों की सुविधा हेतु —
    • हाइजीन शौचालय,
    • बेड, गद्दे, कंबल,
    • कुर्सी-मेज,
    • नाश्ता, भोजन, पानी,
    • इंटरनेट/वाई-फाई सुविधा,
    • प्रेस पास एवं मेला वाहन पास,
    • और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

तिगरी मेले में मीडिया सेंटर बना उपेक्षा का प्रतीक — पत्रकारों का बहिष्कार निर्णय

पत्रकारों ने बताया कि तिगरी गंगा मेला, जो धार्मिक आस्था और जनसमूह का केंद्र है, उसमें मीडिया सेंटर की स्थिति दयनीय है।
मीडिया के लिए बनाए गए प्रेस कैंप में शराबियों का कब्जा है, जिससे पत्रकारों के बैठने और कार्य करने का वातावरण दूषित हो गया है।
इस पर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, ग्रामीण आंचलिक पत्रकार एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश आंचलिक पत्रकार समिति के पदाधिकारियों ने एकस्वर में कहा —

“यदि पत्रकारों के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित सुविधाएं नहीं दी गईं, तो संयुक्त रूप से तिगरी मेले की कवरेज का बहिष्कार किया जाएगा।”

डीएम निधि गुप्ता वत्स ने दिया आश्वासन — “व्यवस्थाओं में सुधार होगा”

डीएम निधि गुप्ता वत्स ने पत्रकारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि प्रशासन पत्रकारों के सहयोग के बिना किसी आयोजन की कल्पना भी नहीं कर सकता।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि

“तिगरी धाम गंगा स्नान मेले में मीडिया सेंटर को पूरी तरह सुसज्जित किया जाएगा। पत्रकारों की सभी आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।”

✍️ पत्रकार प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे प्रमुख नाम:

  • महिपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति
  • डॉ. तारिक अज़ीम, महासचिव
  • बी.एस. आर्य, उपाध्यक्ष
  • तुलाराम ठाकुर, संरक्षक
  • शिव ओम शर्मा
  • मनोज कुमार
  • जितेन्द्र शर्मा
    सहित जिले के अनेक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

💬 पत्रकारों का संदेश सरकार को — “पत्रकारिता अपराध नहीं, समाज की सेवा है”

पत्रकारों ने कहा कि आज पत्रकारिता करना किसी रणभूमि से कम नहीं। सच्चाई दिखाने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ रही है।
उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया —

“जब डॉक्टर, शिक्षक, और वकीलों के लिए सुरक्षा कानून हो सकता है, तो पत्रकारों के लिए क्यों नहीं?”

पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने इस बार ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश स्तर पर ‘पत्रकार सुरक्षा आंदोलन’ छेड़ा जाएगा।

📍 निष्कर्ष:

अमरोहा से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में गूंजने लगी है। पत्रकार केवल कलम के सिपाही नहीं, लोकतंत्र के प्रहरी हैं।
“यदि प्रहरी ही असुरक्षित रहेंगे, तो लोकतंत्र की दीवार कितनी मजबूत रह पाएगी?”
इस प्रश्न का उत्तर अब सरकार को देना होगा।

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