रबी सीजन 2025-26: बिजनौर प्रशासन हुआ सख्त — उर्वरक वितरण में गड़बड़ी पर होगी सीधी कार्रवाई!
किसानों को राहत और कालाबाज़ारियों को चेतावनी — “एक रुपये भी ज़्यादा नहीं, टैगिंग बंद नहीं तो लाइसेंस जब्त”
बिजनौर, 28 अक्टूबर 2025 —
रबी सीजन की तैयारियों के बीच बिजनौर प्रशासन ने किसानों के हित में बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह साफ कर दिया है कि किसानों को निर्धारित दरों पर ही उर्वरक मिलेंगे, और किसी भी विक्रेता को अब मनमानी करने की छूट नहीं दी जाएगी।
प्रशासन ने इस बार कालाबाज़ारी, कृत्रिम संकट और उत्पादों की जबरन टैगिंग करने वाले विक्रेताओं पर सीधी कार्रवाई का फरमान सुनाया है। किसानों से भी अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी गड़बड़ी की तुरंत शिकायत करें।
जनपद में उर्वरकों की वर्तमान उपलब्धता:
प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, इस बार रबी सीजन के लिए उर्वरकों की आपूर्ति लगातार हो रही है —
| उर्वरक का नाम | निर्धारित लक्ष्य (मी. टन) | वर्तमान उपलब्धता (मी. टन) |
|---|---|---|
| यूरिया | 45,973 | 16,473 |
| डीएपी (DAP) | 16,560 | 4,925.87 |
| एनपीके (NPK) | 5,451 | 974 |
| एसएसपी (SSP) | 5,823 | 3,914 |
प्रशासन का दावा है कि शेष मात्रा भी जल्द ही जनपद में उपलब्ध करा दी जाएगी ताकि किसी किसान को उर्वरक की कमी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन के आदेश — “साफ दीवारें, साफ दाम”
अब सभी सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं को यह आदेश दिया गया है कि:
- दुकानों की दीवारों पर पक्के पेंट से बिक्री मूल्य, सरकारी सब्सिडी व कुल मूल्य लिखना अनिवार्य होगा।
- यूरिया, डीएपी या एनपीके के साथ किसी अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग सख्त मना है।
- किसान को कैश मीमो और POS रसीद देना अनिवार्य है।
- विक्रेता किसान की जोतबही और फसल के अनुसार ही उर्वरक देंगे।
यदि कोई विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तत्काल रद्द कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से प्रशासन की अपील: “सतर्क बनें, जागरूक रहें”
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे उर्वरक खरीदते समय आधार कार्ड साथ रखें, POS मशीन पर अपनी पहचान सत्यापित करें, और रसीद लेना न भूलें।
📱 शिकायत के लिए व्हाट्सएप नंबर: 7844996360
कोई भी किसान अधिक दाम वसूलने, टैगिंग या कालाबाज़ारी की सूचना सीधे इस नंबर पर भेज सकता है।
गंभीर चेतावनी विक्रेताओं के लिए:
“यूरिया या डीएपी के साथ अन्य उत्पाद की जबरन बिक्री करते पकड़े गए तो सीधी कार्रवाई होगी — दुकान सील और लाइसेंस रद्द।”
— जिलाधिकारी कार्यालय, बिजनौर
वैज्ञानिक खेती की सलाह — “अधिक उर्वरक का मतलब बेहतर फसल नहीं”
कृषि विभाग ने किसानों को सचेत किया है कि फसलों में संस्तुति से अधिक उर्वरक डालने से उत्पादन घटता है, मिट्टी की उर्वरता खत्म होती है और कीट-रोग का प्रकोप बढ़ जाता है।
इसलिए किसानों को केवल कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की सिफारिश अनुसार ही उर्वरक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
💬 ग्रामीण इलाकों में सराहना — “पहली बार इतनी सख्ती, अब राहत की उम्मीद”
ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल की सराहना हो रही है। नजीबाबाद, अफज़लगढ़, नगीना और बढ़ापुर क्षेत्र के कई किसानों ने कहा कि पहले अक्सर दुकानदार यूरिया के साथ महंगे सूक्ष्म पोषक तत्वों की जबरन बिक्री करते थे, लेकिन अब प्रशासन की सख्ती से राहत की उम्मीद बढ़ी है।
निष्कर्ष:
यह अभियान न केवल किसानों के हित की रक्षा करेगा, बल्कि उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। प्रशासन की सख्त नीति से उम्मीद है कि इस रबी सीजन में किसान बेफिक्र होकर खेती पर ध्यान दे सकेंगे।
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