सिर में फ्रैक्चर की फर्जी रिपोर्ट का मामला: बिजनौर के सीएमएस घिरे जांच और कोर्ट की कार्रवाई में!
न्याय की लड़ाई कोर्ट तक पहुँची, सीजेएम ने रेडियोलॉजिस्ट को भेजा नोटिस — मेडिकल रिपोर्ट की सच्चाई पर उठे सवाल
मामले की पृष्ठभूमि
बिजनौर जनपद में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला पुरुष अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बी.आर. त्यागी विवादों में घिर गए हैं। मामला सिर में फ्रैक्चर की संदिग्ध रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसे लेकर पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली है।
नजीबाबाद निवासी इरशाद ने अपने पुत्र अरशद के खिलाफ दर्ज मुकदमे में मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
इरशाद के अनुसार, उसके बेटे अरशद का विवाह वर्ष 2015 में नजीबाबाद की एक युवती से हुआ था। वैवाहिक विवादों के बाद युवती ने नजीबाबाद थाने में दहेज उत्पीड़न व मारपीट की एफआईआर दर्ज कराई।
लेकिन —
इरशाद का आरोप है कि 12 मई 2022 को युवती और उसके परिजनों ने नजीबाबाद के बजाय सांठगांठ कर कोतवाली देहात में मेडिकल कराया, जिसमें सिर की चोट का एक्स-रे करवाया गया।
यह एक्स-रे अगले दिन, यानी 13 मई 2022 को जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. बी.आर. त्यागी द्वारा किया गया। रिपोर्ट में “फ्रंटल बोन और फ्रंटल साइनस में फ्रैक्चर” दर्शाया गया — जिसके आधार पर धारा 308 (हत्या के प्रयास) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
दूसरे मेडिकल में खुली पोल
इरशाद ने इसे साजिश और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बताते हुए मुरादाबाद के मंडलायुक्त से शिकायत की।
शिकायत पर एडी मुरादाबाद की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठित किया गया।
बोर्ड ने 2023 में पुनः एक्स-रे और जांच की —
“सिर में किसी भी प्रकार का फ्रैक्चर नहीं पाया गया।”
इस रिपोर्ट की पुष्टि 12 अप्रैल 2023 को एडी मुरादाबाद को भेजे गए पत्र से हुई।
कोर्ट ने लिया संज्ञान
न्याय न मिलने पर इरशाद ने सीजेएम कोर्ट, बिजनौर में याचिका दायर की।
कोर्ट ने अब सीएमएस डॉ. बी.आर. त्यागी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है।
पीड़ित का कहना है कि युवती के पिता और डॉक्टर ने मिलकर फर्जी रिपोर्ट बनवाई ताकि पूरे परिवार को जेल भेजा जा सके।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
इरशाद का आरोप है कि मामले की गंभीरता के बावजूद स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे पीड़ित परिवार को वर्षों तक मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।
अब जब कोर्ट ने नोटिस जारी किया है, तब मामले ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे दोनों में हलचल मचा दी है।
स्थानीय हलकों में चर्चा तेज
- कई स्वास्थ्यकर्मी मानते हैं कि अगर मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होती है, तो यह राजकीय चिकित्सकों की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न है।
- वहीं, डॉक्टरों के कुछ सहयोगी यह भी कह रहे हैं कि “मेडिकल निष्कर्ष का गलत अर्थ निकाला जा सकता है, अंतिम सत्य जांच से ही सामने आएगा।”
मामले की अगली सुनवाई का इंतज़ार
फिलहाल कोर्ट ने डॉ. त्यागी को नोटिस भेज दिया है।
मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि —
👉 क्या रिपोर्ट वाकई फर्जी थी या
👉 कोई तकनीकी त्रुटि को बेवजह “साजिश” करार दिया गया।
📌 विशेष रिपोर्ट — “न्यूज़ सेंट्रल डेस्क, बिजनौर”
(संपादन: अवनीश त्यागी)












