संत समाज ने धार्मिक स्वातंत्र्य विधेयक के समर्थन में निकाला विशाल मार्च
बिजनौर में हिंदू समाज और मातृशक्ति का जोरदार प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट तक पहुंचा संदेश “धर्मांतरण बंद हो”
📍 प्रदर्शन का मार्ग और नेतृत्व
- स्थान: प्रदर्शनी मैदान → कलेक्ट्रेट
- नेतृत्व: पूज्य महंत कपिल पुरी जी महाराज (श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, ज्ञान आश्रम भूरिया सोत नांगल)
- संगठनों की भागीदारी: संत समाज, मातृशक्ति, स्थानीय हिंदू समाज
मुख्य नारे और संदेश
| नारा | महत्व |
|---|---|
| धर्मांतरण बंद हो | समाज की सांस्कृतिक सुरक्षा |
| धर्मांतरण नहीं सहेंगे | स्वतंत्र आस्था का समर्थन |
| धर्म रक्षा चाहिए | संविधान की रक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता |
महंत कपिल पुरी जी का संदेश
- “भारत की आत्मा उसकी विविधता में बसती है, और इस विविधता की रक्षा का आधार धार्मिक स्वतंत्रता है।”
- हर व्यक्ति को अपनी आस्था और पूजा पद्धति अपनाने का अधिकार है।
- धर्मांतरण किसी की स्वतंत्रता और समाज की सांस्कृतिक अस्मिता पर चोट है।
- संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म प्रचार का अधिकार देता है, लेकिन किसी पर दबाव, छल या लालच से धर्म परिवर्तन करना अनुचित है।
- विदेशी धन और मिशनरी संगठन गरीब बस्तियों, गांवों और जंगलों में धर्मांतरण का गोरखधंधा चला रहे हैं।
कानून और प्रशासन पर जोर
- धर्मांतरण विरोधी कानून देश की सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में इन कानूनों को चुनौती देना देश की मूल संस्कृति को कमजोर करने जैसा है।
- प्रशासन से अपील: कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करें।
संत और नागरिकों की मौजूदगी

मुख्य उपस्थित संत:
- सुभाष चंद्र जी महाराज (नजीबाबाद)
- सातवेंद्र सिंह नाथ जी (किरतपुर)
- भूपेंद्र सिंह जी (शाह नगर हल्दौर)
- नागेंद्र पुरी जी (रामपुर नजीबाबाद)
- कुलदीप शर्मा जी (हीमपुर बुजुर्ग)
- जयप्रकाश आर्य जी (बाखरपुर बिजनौर)
- महंत गोविंद नंद पुरी जी (मंसूरपुर बसेड़ा)
- आकाश जोशी जी (नांगल सोती)
- बाबा शाकुंभरी वाले (नजीबाबाद)
- मांगेराम दास जी (संत आश्रम उमरी)
- सुरेंद्र पुरी जी महाराज (अमरनाथ मंदिर, रामपुर)
- महंत गोपाल दास जी
सैकड़ों संत, साधु और स्थानीय नागरिक प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शन का सार और उद्देश्य
- संत समाज और हिंदू समाज ने एकजुट होकर धार्मिक स्वातंत्र्य विधेयक का समर्थन किया।
- कलेक्ट्रेट में पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
- यह कदम भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए जागरूकता पैदा करने वाला माना गया।
विशेष हाइलाइट्स
- धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए समाजिक एकता
- स्थानीय नागरिकों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी
- प्रशासन और कानून से निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करने की अपील












