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बिजनौर में औद्योगिक इकाइयों पर छापेमारी, तकनीकी ग्रेड यूरिया के इस्तेमाल का खुलासा

बिजनौर में औद्योगिक इकाइयों पर छापेमारी, तकनीकी ग्रेड यूरिया के इस्तेमाल का खुलासा

नीम-कोटेड अनुदानित यूरिया का उपयोग नही

बिजनौर, 11 अगस्त 2025 |
उत्तर प्रदेश शासन और जिलाधिकारी बिजनौर के निर्देश पर सोमवार को जिले में औद्योगिक इकाइयों पर विशेष निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की गई। जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम — जिसमें सहायक आयुक्त, जिला उद्योग एवं उद्यमिता विकास केंद्र, उप कृषि निदेशक, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक और अन्य अधिकारी शामिल थे — ने कुल 09 चिन्हित औद्योगिक इकाइयों की जांच की।

यह कार्रवाई मुख्य रूप से प्लाईवुड और बोर्ड उद्योग से जुड़ी इकाइयों पर केंद्रित रही, क्योंकि इन उद्योगों में चिपकने वाले (एडहेसिव) तैयार करने के लिए तकनीकी ग्रेड यूरिया का उपयोग किया जाता है।

 छापामारी के दौरान सामने आए तथ्य

  • 04 औद्योगिक इकाइयां पूरी तरह बंद मिलीं।
  • 03 प्लाईवुड इकाइयों में तकनीकी ग्रेड यूरिया का प्रयोग पाया गया।
  • 03 औद्योगिक इकाइयों में मेलामिन और अन्य रसायनों से उत्पाद बनते पाए गए।
  • एक निरीक्षित फर्म में डीजल निकास द्रव की बाल्टी पाई गई।
  • अम्बिका बोर्ड इंडस्ट्रीज (नजीबाबाद), सेठी बोर्ड इंडस्ट्रीज (नजीबाबाद) और जगदम्बा वुड इंडस्ट्रीज (चांदपुर) से तकनीकी ग्रेड यूरिया के 03 नमूने लिए गए।
  • नमूनों को नीम ऑयल कंटेंट परीक्षण के लिए अधिसूचित प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

 अनुदानित यूरिया के दुरुपयोग का कोई मामला नहीं

निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि इन औद्योगिक इकाइयों में केवल तकनीकी ग्रेड यूरिया का ही इस्तेमाल हो रहा था, नीम-कोटेड अनुदानित यूरिया का न तो भंडारण मिला और न ही उसका उपयोग पाया गया। यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि अनुदानित यूरिया कृषि कार्यों के लिए ही आरक्षित है और इसका औद्योगिक उपयोग कानूनन प्रतिबंधित है।

जिन इकाइयों पर कार्रवाई हुई

  • जगदम्बा वुड इंडस्ट्रीज, चांदपुर
  • अम्बिका बोर्ड इंडस्ट्रीज, नजीबाबाद
  • शिवा औद्योगिक संस्थान, नजीबाबाद
  • सेठी बोर्ड इंडस्ट्रीज, नजीबाबाद
  • ताज बोर्ड इंडस्ट्रीज, नजीबाबाद
  • हरिहर प्लाईवुड, नजीबाबाद
  • नाज प्लाईवुड, नजीबाबाद
  • मंगला प्लाईवुड, बिजनौर
  • सुपर बोर्ड इंडस्ट्रीज, बिजनौर
  • सीएनएस मोर्टस, बिजनौर

 प्रशासन का संदेश

जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई औद्योगिक इकाइयों की कार्यप्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कृषि उद्देश्यों के लिए आरक्षित रसायनों के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी ग्रेड यूरिया औद्योगिक कार्यों के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध है, लेकिन इसका सही प्रकार से उपयोग और भंडारण सुनिश्चित करना जरूरी है।

यह छापामारी उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्रों में संसाधनों के सही उपयोग की निगरानी का संकेत है। भले ही अनुदानित यूरिया का दुरुपयोग नहीं मिला, लेकिन तकनीकी ग्रेड यूरिया के नमूनों की जांच से यह सुनिश्चित होगा कि मानकों से कोई समझौता तो नहीं हो रहा। यह कदम स्थानीय उद्योगों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की दिशा में अहम माना जा रहा है।

 

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