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किसान वार्ता विफल, 13 अगस्त का आंदोलन अब अनिश्चितकालीन और वृहद रूप लेगा

किसान वार्ता विफल, 13 अगस्त का आंदोलन अब अनिश्चित काल और वृद्ध रूप में शामिल है       
              विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

बिजनौर के महात्मा विदुर सभागार में 11 अगस्त 2025 को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच 13 अगस्त को प्रस्तावित धरने को लेकर हुई वार्ता पूर्णतः विफल रही।
किसानों का आरोप है कि 21 जुलाई को दिए गए मांग पत्र पर चर्चा के बावजूद कोई भी सक्षम अधिकारी उपस्थित नहीं था, जिससे समाधान की उम्मीद ध्वस्त हो गई।
भाकियू नेताओं ने अब आंदोलन को वृहद और अनिश्चितकालीन बनाने का ऐलान कर दिया है, चाहे बारिश हो या आंधी, आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का स्पष्ट संदेश है कि जब तक समस्याओं का समाधान करने वाले उच्च अधिकारी वार्ता में शामिल नहीं होंगे, तब तक बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।

मुख्य बिंदु

  • बैठक की तारीख व स्थान:
    11 अगस्त 2025, महात्मा विदुर सभागार, कलेक्ट्रेट बिजनौर
  • वार्ता का उद्देश्य:
    13 अगस्त को प्रस्तावित भाकियू धरने से पहले 21 जुलाई के मांग पत्र पर चर्चा
  • प्रशासनिक कमी:
    बैठक में समाधान करने में सक्षम विभागीय उच्च अधिकारी मौजूद नहीं थे
    अध्यक्षता कर रहे एसडीएम सदर अपनी ही तहसील की समस्याओं का समाधान नहीं करा सके
  • वार्ता का परिणाम:
    किसान नेताओं ने नारेबाजी के बीच बैठक कक्ष छोड़ दिया
    वार्ता को ‘बेकार’ और ‘अर्थहीन’ करार दिया
  • भाकियू का ऐलान:
    • 13 अगस्त को आंदोलन अब अनिश्चितकालीन होगा
    • बारिश, आंधी जैसी परिस्थितियां भी आंदोलन नहीं रोकेंगी
    • केवल सक्षम उच्च अधिकारी की मौजूदगी में ही भविष्य की वार्ता संभव
  • किसान नेतृत्व:
    भाकियू जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान
    साथ में मौजूद प्रमुख किसान नेता – राम अवतार सिंह, कुलदीप सिंह, बाबूराम तोमर, मनप्रीत सिंह, प्रमोद कुमार, जितेंद्र सिंह, मुनेंद्र काकरान, संदीप त्यागी, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, विजय चौधरी, धर्मेंद्र कुमार, अवनीश कुमार, गजेंद्र सिंह, मुनेश अहलावत, अमरपाल सिंह, कल्याण सिंह, ऋषिपाल सिंह, हरीराज सिंह, कोमन सिंह, सोनू वीरक, कवराज सिंह, विनीत चौधरी, मुनिदेव, आशु चौधरी, अजय बालियान, अमित कुमार, अशोक कुमार और शुभम आकाश चौधरी किरत बालियान

विश्लेषण

  • प्रशासन की उपेक्षा और गैर-गंभीरता ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया है।
  • यह आंदोलन केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
  • यदि 13 अगस्त को भी समाधान के संकेत नहीं मिले तो यह आंदोलन क्षेत्रीय से प्रदेशीय स्तर पर फैल सकता है।

 

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