8000 करोड़ का सोलर प्रॉजेक्ट: निवेश की राह में भ्रष्टाचार, फिर मिली हरी झंडी

रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान
ग्रेटर नोएडा। प्रदेश सरकार ने यमुना सिटी औद्योगिक क्षेत्र में 8000 करोड़ रुपये के सोलर प्रॉजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण निवेश परियोजना को मंजूरी मिलने में भ्रष्टाचार एक बड़ा रोड़ा बना, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया। इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश पर 5% कमीशन मांगने के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। अब यह निवेश योजना फिर से पटरी पर आ गई है।
भ्रष्टाचार बना निवेश में बाधा
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन कुछ अधिकारियों की भ्रष्ट मानसिकता इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रही है। यमुना सिटी में 8000 करोड़ के सोलर प्रॉजेक्ट को इसी कारणवश पहले रोका गया था।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब लखनऊ की एक कंपनी ने गौतम बुद्ध नगर के यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में सोलर उपकरण निर्माण के लिए निवेश प्रस्ताव दिया। आरोप है कि इन्वेस्ट यूपी के तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए दलाल निकांत जैन के जरिए 5% कमीशन की मांग की। शिकायत के बाद अभिषेक प्रकाश को 20 मार्च को सस्पेंड कर दिया गया और निकांत जैन को गिरफ्तार कर लिया गया।
मुख्य सचिव की पहल से प्रॉजेक्ट को मिली मंजूरी
निलंबन के बाद मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, जिनके पास अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (IIDC) का भी प्रभार है, ने पूरे मामले की समीक्षा की। उन्होंने न केवल इस परियोजना को पुनः सक्रिय किया, बल्कि इन्वेस्ट यूपी में लंबित अन्य निवेश प्रस्तावों की भी समीक्षा की।
निवेश प्रस्ताव और प्रॉजेक्ट की योजना
SAEL सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने यमुना सिटी क्षेत्र में सोलर सेल, सोलर पैनल और सोलर प्लांट उपकरण निर्माण के लिए आवेदन किया था। इस प्रॉजेक्ट के तहत:
- कुल 8000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
- पहले चरण में 4500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे 5,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी।
- दूसरे चरण में 3500 करोड़ रुपये का निवेश कर प्रॉजेक्ट का विस्तार किया जाएगा।
- कंपनी ने 200 एकड़ जमीन, बिजली, पानी और लैंड सब्सिडी की मांग की है।
- निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत कंपनी को नियमानुसार सब्सिडी भी दी जाएगी।
निष्कर्ष: पारदर्शिता से निवेश को मिलेगा बढ़ावा
यह मामला दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से यह प्रक्रिया बाधित हो रही है। हालांकि, राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई से यह सुनिश्चित हुआ कि निवेश प्रस्ताव ठंडे बस्ते में न जाए।
भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी नीतियों के जरिए ही राज्य में औद्योगिक विकास को गति दी जा सकती है। अब देखना होगा कि यह प्रॉजेक्ट कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और प्रदेश की औद्योगिक प्रगति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।











