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ग्राम चौपालों से ग्रामीण विकास को नई गति

ग्राम चौपालों से ग्रामीण विकास को नई गति

    एक सफल पहल बनी “ग्राम चौपाल” योजना

फाइल फोटो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की “ग्राम चौपाल” पहल ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में चल रही इस योजना के तहत प्रत्येक शुक्रवार को प्रदेश के हर विकास खंड की दो ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपालों का आयोजन किया जाता है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता की समस्याओं का उनके गाँव में ही समाधान करना है, ताकि आमजन को जिला या तहसील स्तर पर भटकना न पड़े।

समस्याओं का समाधान गाँव में ही

अब तक आयोजित 1,31,000 से अधिक ग्राम चौपालों के माध्यम से 4,84,000 से अधिक समस्याओं/प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है। इस पहल के तहत ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है, जिससे वे अपने अधिकारों और योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।

पिछले शुक्रवार को ही 1,327 ग्राम पंचायतों में ग्राम चौपालें आयोजित की गईं, जिनमें 3,047 मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया। इन चौपालों में ब्लॉक और ग्राम स्तर के 9,500 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे, जिससे त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिली। इस दौरान 67,000 से अधिक ग्रामीणों ने चौपालों में सक्रिय भागीदारी निभाई, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में चौपालों की भूमिका

ग्राम चौपालें न केवल व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं के समाधान में कारगर सिद्ध हो रही हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन में भी सहायक बनी हैं। उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के पात्र लाभार्थियों के चयन में ग्राम चौपालों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन चौपालों के माध्यम से पात्रता की पारदर्शी जांच की जा रही है, ताकि जरूरतमंदों को समय से आवास मिल सके। 31 मार्च 2025 तक नए पात्र लाभार्थियों के चयन की समय-सीमा निर्धारित की गई है, और इस कार्य को गति देने के लिए चौपालों का अधिक से अधिक उपयोग किया जा रहा है।

ग्राम चौपालों से प्रशासन की जमीनी पकड़ मजबूत

ग्राम चौपालों के आयोजन से सरकार को ग्रामीण स्तर पर चल रही विभिन्न परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति का पता चल रहा है। इन चौपालों में न केवल व्यक्तिगत समस्याओं पर चर्चा होती है, बल्कि सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी तत्काल निर्णय लिए जाते हैं

सरकार इस कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए चौपालों के पूर्व गाँवों में सफाई अभियान चलाने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान दे रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

जनभागीदारी और सुशासन का प्रभावी मॉडल

“ग्राम चौपाल” कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार के सुशासन मॉडल का एक उदाहरण बन चुका है। यह न केवल जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम कर रहा है, बल्कि समस्याओं के त्वरित समाधान का एक प्रभावी माध्यम भी बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की जानकारी और क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए इस तरह की पहलें भविष्य में भी आवश्यक रहेंगी।

इस पहल की सफलता यह दर्शाती है कि यदि प्रशासन जनता तक स्वयं पहुँचता है, तो न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान होता है, बल्कि शासन की जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ती है। उत्तर प्रदेश की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकती है।

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