Target Tv Live

गजरौला: मजदूरी मांगने पर महिला से बर्बरता, पुलिस कार्रवाई से इंकार

गजरौला: मजदूरी मांगने पर महिला से बर्बरता, पुलिस कार्रवाई से इंकार

रिपोर्ट: जितेंद्र शर्मा

गजरौला/अमरोहा : उत्तर प्रदेश के गजरौला क्षेत्र में एक मजदूर महिला के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि जब महिला ने अपनी मेहनत की मजदूरी मांगी, तो राज मिस्त्री ठेकेदार और उसकी पत्नी ने उसके साथ मारपीट की और उसे निवस्त्र कर अपमानित किया। दुखद पहलू यह है कि पीड़िता पुलिस से न्याय की गुहार लगाती रही, लेकिन उसे अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।

क्या है मामला?

गजरौला के औद्योगिक क्षेत्र चौकी क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने डेढ़ महीने तक एक राज मिस्त्री ठेकेदार के पास काम किया। 13 मार्च को जब वह अपनी मजदूरी लेने गई, तो ठेकेदार और उसकी पत्नी ने कथित रूप से न केवल उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसके कपड़े भी फाड़ दिए। महिला का आरोप है कि उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और बेरहमी से पीटा गया।

इसके बाद महिला न्याय की तलाश में औद्योगिक चौकी और स्थानीय थाने गई, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। महिला ने सीओ कार्यालय तक जाकर गुहार लगाई, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अब पीड़िता ने एसपी से आरोपी दंपती के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता है। यदि एक महिला खुलेआम न्याय की मांग कर रही है और पुलिस उसकी शिकायत को नजरअंदाज कर रही है, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। महिला के आरोप बेहद गंभीर हैं—शारीरिक हिंसा, सार्वजनिक रूप से अपमान और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़े। बावजूद इसके, पुलिस का कोई कदम न उठाना दिखाता है कि कमजोर वर्गों की आवाज़ को अक्सर दबा दिया जाता है।

मजदूरों के शोषण का मामला

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि कैसे मजदूर वर्ग, विशेष रूप से महिला मजदूर, अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। काम के बदले मजदूरी मांगना हर श्रमिक का हक़ है, लेकिन जब इसका जवाब हिंसा और अपमान से दिया जाता है, तो यह समाज में गहरी असमानता और शोषण को उजागर करता है।

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

  1. तत्काल पुलिस हस्तक्षेप: पुलिस को महिला की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
  2. मजदूरों की सुरक्षा: ऐसे मामलों को रोकने के लिए मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हेतु सख्त कानूनों को लागू करना चाहिए।
  3. न्यायिक हस्तक्षेप: यदि स्थानीय प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

यह घटना न केवल महिला मजदूरों के शोषण को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से पुलिस प्रशासन पीड़ितों की आवाज़ को अनसुना कर देता है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें