Target Tv Live

बिजनौर में मीट ले जा रहे वाहनों पर हंगामा: हिंदू संगठनों और भाजपा पदाधिकारियों ने जताया विरोध

बिजनौर में मीट ले जा रहे वाहनों पर हंगामा: हिंदू संगठनों और भाजपा पदाधिकारियों ने जताया विरोध
संरक्षित पशु के मीट का आरोप, प्रशासन पर मिलीभगत के सवाल

बिजनौर: शनिवार सुबह बैराज मार्ग पर उस समय माहौल गर्मा गया जब सहारनपुर से मीट लेकर आ रही तीन गाड़ियों को हिंदू संगठनों और भाजपा पदाधिकारियों ने रोक लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाड़ियों में संरक्षित पशु का मीट भरा हुआ है। इस मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम और पुलिस मौके पर पहुंची।

हंगामा और प्रशासन की कार्रवाई

मीट से भरी गाड़ियों को रोकने के बाद संगठनों ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर भी निशाना साधा। आरोप लगाया गया कि खाद्य सुरक्षा विभाग मीट कारोबारियों से मिलीभगत कर रहा है और नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा। हंगामे के बीच खाद्य विभाग ने मौके पर ही एक गाड़ी के मीट का नमूना लिया और उसे नष्ट कर दिया, जबकि दो अन्य गाड़ियों को निकलने देने का आरोप लगाया गया।

इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष अंकुर गौतम, सभासद राजवीर सिंह, दीपक गर्ग मोनू, महेंद्र चौधरी, नीरज विश्नोई, शेखर चौधरी, अरुण अग्रवाल, राजीव सिंह सहित कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे।

प्रशासन का पक्ष

खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनुपम यादव ने बताया कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई और सभी आरोप निराधार हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभाग ने अपनी प्रक्रिया के तहत मीट के नमूने लिए और एक वाहन का मीट नष्ट कराया गया।

मामले का विश्लेषण

यह घटना स्थानीय राजनीति और कानून-व्यवस्था के बीच टकराव का एक उदाहरण है। हिंदू संगठनों और भाजपा पदाधिकारियों द्वारा उठाया गया मुद्दा संवेदनशील है, क्योंकि इसमें धार्मिक भावनाएं, पशु संरक्षण कानून और प्रशासन की भूमिका शामिल हैं।

घटना के दो मुख्य पहलू हैं:

  1. संरक्षित पशु के मीट का आरोप – अगर सच में ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर मामला है और जांच होनी चाहिए।
  2. प्रशासन पर पक्षपात और मिलीभगत के आरोप – अगर खाद्य विभाग की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी, तो यह पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

क्या होगा आगे?

इस मामले में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि गाड़ियों में संरक्षित पशु का मीट था, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अगर प्रशासन पर लगे आरोप निराधार हैं, तो यह एक राजनीतिक स्टंट भी हो सकता है।

यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसे निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई से ही सुलझाया जा सकता है।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें