जिला पंचायत बिजनौर में अभियंता पद को लेकर विवाद

जांच समिति का गठन, कार्यभार ग्रहण में देरी से विकास कार्य प्रभावित
लखनऊ : उत्तर प्रदेश शासन के पंचायती राज विभाग ने जिला पंचायत बिजनौर में अभियंता के पद को लेकर बढ़ती अनियमितताओं और कार्यभार ग्रहण न करने की घटनाओं के बीच दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों से न केवल प्रशासनिक सुस्ती उजागर हुई है, बल्कि विकास कार्यों की गति पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शासन ने जांच समिति का गठन कर तकनीकी कार्यों की समीक्षा के निर्देश दिए हैं, जबकि दूसरी ओर, नियुक्त अभियंता के कार्यभार न संभालने के कारण जिला पंचायत के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है।
तकनीकी कार्यों की जांच के लिए समिति का गठन
4 अगस्त 2024 को जारी आदेश के अनुसार, जिला पंचायत बिजनौर में अभियंता के पद पर तैनात कपिल देव द्वारा 1 जनवरी 2024 से किए गए तकनीकी और अन्य कार्यों की विस्तृत जांच के लिए एक दो-सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में शामिल हैं:
- मुख्य अभियंता (सिविल), जिला पंचायत अनुश्रवण कोषांग, लखनऊ
- जिलाधिकारी बिजनौर द्वारा नामित अधिशासी अभियंता (लोक निर्माण विभाग या ग्रामीण अभियंत्रण विभाग)
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करे, जिससे आगे की कार्रवाई तय की जा सके। जांच के मुख्य बिंदु होंगे:
- वित्तीय अनियमितताएं
- तकनीकी मानकों का उल्लंघन
- अधूरे और गुणवत्ता रहित कार्य
कार्यभार ग्रहण में देरी: नियुक्ति के बावजूद जिम्मेदारी से इनकार
27 अगस्त 2024 को जारी दूसरे आदेश के अनुसार, शासन ने 29 जून 2024 को श्री तिलक राज उपाध्याय को जिला पंचायत, बिजनौर में अभियंता के पद पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। लेकिन, कई बार सूचना भेजने के बावजूद उन्होंने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
इस मामले में शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि तिलकराज उपाध्याय जल्द कार्यभार ग्रहण नहीं करते, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, जिलाधिकारी और जिला पंचायत के उच्च अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया को पूरा कराएँ।
विकास कार्यों पर असर और प्रशासन की चिंता
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायत स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों को हो रहा है। अभियंता के पद पर स्थायी कार्यभार न होने के कारण:
- निर्माण कार्यों में देरी: लंबित परियोजनाएं और नई योजनाओं की स्वीकृति अटक रही है।
- गुणवत्ता नियंत्रण में कमी: तकनीकी निरीक्षण न होने से कार्यों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
- वित्तीय गड़बड़ी की आशंका: अभियंता की अनुपस्थिति में भुगतान और खर्च की निगरानी कमजोर हो गई है।
शासन की रणनीति और आगे की राह
शासन ने साफ किया है कि जांच रिपोर्ट और कार्यभार ग्रहण की स्थिति के आधार पर कड़े फैसले लिए जाएंगे। अगर तिलक राज उपाध्याय कार्यभार नहीं संभालते हैं, तो उनकी नियुक्ति को रद्द कर किसी अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं, जांच समिति की रिपोर्ट में यदि अनियमितताएं सामने आती हैं, तो दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय जनता की उम्मीदें
बिजनौर के ग्रामीण क्षेत्रों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी है, क्योंकि पंचायत स्तर पर चल रहे कई विकास कार्य रुके हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि शासन जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा, ताकि अधूरे काम पूरे हों और नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत हो सके।
जिला पंचायत बिजनौर में अभियंता पद को लेकर चल रही खींचतान ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन की ओर से तेजी से लिए जा रहे फैसले यह संकेत देते हैं कि अब इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले हफ्तों में जांच समिति की रिपोर्ट और कार्यभार ग्रहण की स्थिति से यह साफ हो जाएगा कि इस प्रशासनिक संकट का हल कितना जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से निकाला जाता है।










