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“वन अधिकारियों को मिला नया मंच! नई कार्यकारिणी के गठन से सिस्टम में आने वाले हैं बड़े बदलाव?”

‘ठप पड़ा था वन सेवा संघ, अब नई टीम के साथ बड़ा ‘रीबूट’! जगदंबिका प्रसाद बने अध्यक्ष—क्या बदलेगा सिस्टम?’

अध्यक्ष: जगदंबिका प्रसाद श्रीवास्तव
उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह
वर्षों की निष्क्रियता के बाद संगठन में जान, नई कार्यकारिणी से वन अधिकारियों की आवाज़ को मिलेगी नई ताकत
महामंत्री + कोषाध्यक्ष: अनुराग तिवारी

📍 लखनऊ | TargetTvLive

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

उत्तर प्रदेश राज्य वन सेवा संघ में लंबे समय से चली आ रही सुस्ती और संगठनात्मक ठहराव को आखिरकार नई कार्यकारिणी ने तोड़ दिया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित अहम बैठक में सर्वसम्मति से नई टीम का गठन किया गया, जिसमें जगदंबिका प्रसाद श्रीवास्तव को अध्यक्ष और अनुराग तिवारी को महामंत्री (साथ ही कोषाध्यक्ष) की जिम्मेदारी सौंपी गई।

यह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि उस संगठन का “रीबूट” है, जो वर्षों से निष्क्रियता और नेतृत्व के अभाव से जूझ रहा था।

बैकग्राउंड: क्यों जरूरी था यह बदलाव?

उत्तर प्रदेश राज्य वन सेवा संघ, जो शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संगठन है, पिछले काफी समय से निष्क्रिय स्थिति में था।

  • महाधिवेशन आयोजित नहीं हो पा रहा था
  • पुराने पदाधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके थे
  • कोई निर्वाचित कार्यकारिणी मौजूद नहीं थी
  • अधिकारियों की समस्याएं मंच तक नहीं पहुंच पा रही थीं

इस वजह से न केवल संगठन कमजोर हुआ, बल्कि वन विभाग से जुड़े मुद्दों की आवाज भी धीमी पड़ गई।

कैसे हुआ ‘रीसेट’?

27 अप्रैल को लखनऊ में बुलाई गई असाधारण बैठक इस बदलाव का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।

  • बैठक में आवश्यक कोरम पूरा हुआ
  • सभी पदों पर सर्वसम्मति बनी
  • बिना किसी विरोध के पूरी कार्यकारिणी का गठन हुआ

यही कारण है कि इस चुनाव को “संघ का पुनर्जन्म” माना जा रहा है।

नई टीम: कौन क्या संभालेगा?

  • अध्यक्ष: जगदंबिका प्रसाद श्रीवास्तव
  • उपाध्यक्ष: ज्ञान सिंह
  • महामंत्री + कोषाध्यक्ष: अनुराग तिवारी
  • संयुक्त सचिव: सतेंद्र तोमर

 सदस्य (सहायक वन संरक्षक स्तर)

  • आर्शी मलिक
  • चंदन चौधरी
  • विनीत कुमार सिंह

 संरक्षक

  • ओम प्रकाश सिंह (सेवानिवृत्त DFO, पूर्व महामंत्री)

ग्राउंड एनालिसिस: क्या बदल सकता है?

🔹 1. अधिकारियों की आवाज़ होगी तेज

अब वन अधिकारियों के ट्रांसफर, प्रमोशन, संसाधनों और कार्य स्थितियों से जुड़े मुद्दे मजबूती से उठाए जा सकेंगे।

🔹 2. सरकार के साथ संवाद मजबूत

नई कार्यकारिणी शासन और विभाग के बीच “ब्रिज” का काम कर सकती है, जिससे नीतिगत फैसलों में सुधार की उम्मीद है।

🔹 3. पर्यावरण नीतियों पर असर

वन संरक्षण, अवैध कटान और पर्यावरण सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संघ की सक्रिय भूमिका दिख सकती है।

🔹 4. संगठन में नई ऊर्जा

युवा और अनुभवी अधिकारियों का मिश्रण संगठन को नई दिशा और गति देगा।

 बड़ी चुनौतियां भी सामने

  • निष्क्रिय संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना
  • सभी जिलों के अधिकारियों को एक मंच पर लाना
  • वन विभाग की जटिल समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाना
  • सरकार के साथ संतुलित लेकिन प्रभावी दबाव बनाना

आगे की रणनीति क्या हो सकती है?

सूत्रों के अनुसार, नई कार्यकारिणी जल्द ही:

  • महाधिवेशन आयोजित कर सकती है
  • लंबित मुद्दों की सूची तैयार करेगी
  • शासन स्तर पर औपचारिक संवाद शुरू करेगी

 एक्सपर्ट व्यू (विश्लेषण)

यह बदलाव सिर्फ पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि एक संस्थागत पुनर्गठन है। अगर नई टीम सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपनाती है, तो यह संघ वन विभाग में नीतिगत बदलाव का बड़ा केंद्र बन सकता है।

 निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश राज्य वन सेवा संघ की नई कार्यकारिणी का गठन एक संकेत है—कि अब वन विभाग के अधिकारी संगठित होकर अपनी बात रखेंगे।

अब असली परीक्षा इस टीम की कार्यशैली और परिणाम देने की क्षमता पर होगी।

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