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“महिलाओं की आवाज दबाने वालों पर बरसी गीता शाक्य, दादरी सम्मेलन में विपक्ष पर बड़ा हमला!”

दादरी में महिला आक्रोश सम्मेलन: “विपक्ष ने दबाई महिलाओं की आवाज” – गीता शाक्य का तीखा हमला।

रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार | TargetTvLive

गौतमबुद्धनगर। दादरी के मिहिर भोज कॉलेज स्थित गुर्जर भवन में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा द्वारा आयोजित जन आक्रोश महिला जिला सम्मेलन में महिलाओं की भागीदारी और राजनीतिक तेवर दोनों ही चरम पर नजर आए। सम्मेलन की मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद एवं भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि “विपक्ष ने हमेशा महिलाओं की आवाज दबाने का काम किया है, जिसके चलते आज देश की महिलाओं में आक्रोश है।”

“17 अप्रैल महिलाओं के लिए काला दिन”

TargetTvLive से बातचीत और मंच से अपने संबोधन में गीता शाक्य ने कहा कि 17 अप्रैल का दिन लोकतंत्र और देश की बहनों के लिए काला दिन रहा। उन्होंने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा—

“महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण बिल को गिराकर विपक्ष ने बहनों के सपनों और उम्मीदों को तोड़ दिया।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा, लेकिन विपक्ष ने इसे नजरअंदाज किया।

“विपक्ष की नारी विरोधी मानसिकता उजागर”

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद महिला मोर्चा क्षेत्रीय अध्यक्ष बरखा कौशिक ने भी विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा—

“नारी शक्ति वंदन का विरोध कर विपक्ष ने अपनी महिला विरोधी सोच एक बार फिर उजागर कर दी है। अब देश की आधी आबादी इसका जवाब देगी।”

“महिलाएं अब सड़कों पर देंगी जवाब”

TargetTvLive के अनुसार, सम्मेलन में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आने वाले समय में महिलाएं सशक्त होकर सड़कों पर उतरेंगी और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करेंगी। वक्ताओं ने कहा कि महिला सम्मान के मुद्दे पर अब कोई समझौता नहीं होगा।

हजारों महिलाओं की मौजूदगी

कार्यक्रम का संचालन महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष रजनी तोमर ने किया। इस दौरान वीरेन्द्र भाटी, निर्मल भाटी तंवर, वंदना वानखेड़े, गीता सागर, डॉ. संगीता रावल, अपर्णा त्रिपाठी, उषा वत्स, गायत्री तिवारी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और हजारों महिलाओं ने सम्मेलन में भाग लेकर इसे सफल बनाया।

राजनीतिक मायने क्या?

TargetTvLive के विश्लेषण के मुताबिक, यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जहां महिलाओं को केंद्र में रखकर राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है।

निष्कर्ष

दादरी का यह महिला आक्रोश सम्मेलन साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में महिला वोट बैंक और सशक्तीकरण का मुद्दा राजनीति के केंद्र में रहेगा

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