‘जीरो फीस’ का झांसा या संगठित घोटाला? SC छात्र से ₹1.25 लाख वसूली, छात्रवृत्ति रोकी—बिजनौर के कॉलेज पर गंभीर आरोप
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रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
📍 शिक्षा के नाम पर अन्याय?
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था, छात्रवृत्ति प्रणाली और निजी कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विवेक कॉलेज ऑफ टेक्निकल, बिजनौर ने एक अनुसूचित जाति (SC) के छात्र से शून्य शुल्क श्रेणी (F.W.C.) में प्रवेश होने के बावजूद ₹1,25,000 की अवैध फीस वसूल की, और जब छात्र ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया तो उसकी श्रेणी ही बदल दी गई।
छात्र का प्रोफाइल और प्रवेश प्रक्रिया
पीड़ित छात्र गौरव कुमार, बी.फार्म द्वितीय वर्ष का विद्यार्थी है, जो डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU), लखनऊ से संबद्ध इस कॉलेज में अध्ययनरत है।
छात्र के पिता सुनीलपाल मनोहारिया (जिलाध्यक्ष), निवासी मंडावर, बिजनौर, ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दिए गए प्रार्थना पत्र में विस्तृत आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार:
छात्र ने CUET-2024 परीक्षा दी
UPTAC-2024 काउंसलिंग में भाग लेकर रैंक 29224 हासिल की
दिनांक 01 अगस्त 2024 को उसे F.W.C. (शून्य शुल्क श्रेणी) के अंतर्गत सीट अलॉट हुई
अलॉटमेंट लेटर में फीस मात्र ₹12,000 दर्ज थी
👉 खास बात: सीट एक्सेप्टेंस फीस भी कॉलेज द्वारा ही जमा कराई गई, जिससे स्पष्ट है कि कॉलेज को छात्र की श्रेणी की पूरी जानकारी थी।
फिर कैसे वसूले गए ₹1.25 लाख?
यहीं से शुरू होता है विवाद का असली पहलू—
कॉलेज ने प्रथम और द्वितीय वर्ष में छात्र से कुल ₹1,25,000 की फीस वसूल ली
फीस की सभी रसीदें अभिभावक के पास मौजूद हैं
👉 सवाल उठता है कि जब छात्र FWC (Zero Fee Category) में था, तो इतनी भारी फीस क्यों ली गई?
- छात्रवृत्ति में बड़ा खेल: श्रेणी बदलकर कर दिया ब्लॉक!
- जब द्वितीय वर्ष में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया गया, तब:
- समाज कल्याण विभाग के पोर्टल पर छात्र की श्रेणी “Management Quota” दिखाई गई
- फीस ₹70,500 दर्शाई गई
- आवेदन की स्थिति: “Blocked by Management Quota”
- 👉 इसका सीधा मतलब: छात्र की छात्रवृत्ति रोक दी गई
- प्रथम वर्ष में भी देरी, बार-बार शिकायत के बाद मिली छात्रवृत्ति
- शिकायत में यह भी उल्लेख है कि:
- प्रथम वर्ष में छात्र को छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिली
- कई बार शिकायत करने के बाद ही राशि जारी की गई
👉 यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं संस्थान स्तर पर जानबूझकर देरी या भेदभाव किया गया।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन?
प्रार्थी का आरोप है कि:
यह मामला केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति के छात्र के साथ अन्याय है
कॉलेज ने एक तरफ छात्र से मोटी फीस ली, दूसरी तरफ सरकार को कम फीस दिखाकर अनुदान भी प्राप्त किया
👉 यदि यह आरोप सत्य हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।
पहले भी दी गई शिकायत, फिर भी चुप्पी!
दिनांक 25 मार्च 2025 को AKTU लखनऊ और समाज कल्याण विभाग बिजनौर में शिकायत दर्ज कराई गई
लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
👉 इससे प्रशासनिक निष्क्रियता पर भी सवाल उठते हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मांगी गई कार्रवाई
प्रार्थी ने आयोग से मांग की है कि:
₹1,25,000 की अवैध वसूली तत्काल वापस कराई जाए
छात्र की श्रेणी पुनः F.W.C. की जाए
द्वितीय वर्ष की छात्रवृत्ति बहाल की जाए
दोषी कॉलेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए
विशेषज्ञों की नजर में मामला
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी छात्र की श्रेणी में बिना अनुमति बदलाव किया जाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक अपराध है।
यह मामला पूरे प्रदेश में छात्रवृत्ति प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर सकता है।
TargetTvLive की पड़ताल जारी
TargetTvLive इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है।
यदि आपके पास भी इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी या अनुभव है, तो हमें अवश्य साझा करें।
निष्कर्ष: क्या मिलेगा न्याय?
अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है।
देखना होगा कि:
क्या आयोग सख्त कार्रवाई करता है?
क्या एक गरीब SC छात्र को उसका हक मिल पाता है?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
TargetTvLive लगातार इस खबर पर नजर बनाए हुए है—हर अपडेट सबसे पहले आपके सामने लाएंगे।












