केंद्र सरकार की कड़ा संदेश: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से हिचकिचाने वाले आईएएस अधिकारियों की संख्या घटी

नई दिल्ली: कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार र्केद्र सरकार ने हाल ही में 2009 बैच के आईएएस अधिकारियों की संयुक्त सचिव (JS) पद के लिए पैनल सूची जारी की है, जिसमें केवल 16 अधिकारियों को ‘प्रारंभिक’ सूची में शामिल किया गया है। यह अब तक किसी भी बैच में शामिल किए गए अधिकारियों की सबसे कम संख्या है। सरकार के इस कदम को उन आईएएस अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (central deputation) पर आने से बचते हैं।
क्या है मामला ?
पिछले कुछ वर्षों में आईएएस अधिकारियों की केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के प्रति घटती रुचि सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार, आईएएस अधिकारियों को संयुक्त सचिव पद पर नियुक्त होने के लिए केंद्र में न्यूनतम दो वर्ष तक डिप्टी सेक्रेटरी या डायरेक्टर के रूप में सेवा देनी होती है। यह नियम 2007 बैच से लागू किया गया था, लेकिन 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों को कुछ छूट दी गई थी।
हालांकि, 2009 बैच के अधिकारियों के लिए इस नियम को सख्ती से लागू किया गया, जिससे ‘प्रारंभिक’ सूची में शामिल होने वाले अधिकारियों की संख्या में भारी गिरावट आई। जहां 2008 बैच में 111 में से 64 अधिकारियों को सूची में जगह मिली थी, वहीं 2009 बैच में यह संख्या घटकर सिर्फ 16 रह गई।
सरकार का संदेश: केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से इनकार नहीं होगा स्वीकार
विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो राज्य कैडर में बने रहना चाहते हैं और केंद्र में सेवा देने से बचते हैं। केंद्र सरकार यह संकेत देना चाहती है कि संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए उन्हीं अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने केंद्र में काम करने का अनुभव प्राप्त किया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक अधिकारी केंद्र में सेवा दें ताकि नीतिगत निर्णयों में विविधता और व्यापक अनुभव आए। अगर अधिकारी केवल राज्यों में ही सेवा करते रहेंगे, तो यह केंद्र-राज्य प्रशासनिक संतुलन के लिए सही नहीं होगा।”
आईएएस अधिकारियों की घटती रुचि के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, कई आईएएस अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति से बचने के लिए अलग-अलग कारणों का हवाला देते हैं:
1. राज्य में अधिक प्रभाव और स्वायत्तता: राज्य सरकारों में आईएएस अधिकारियों को ज्यादा अधिकार और प्रशासनिक नियंत्रण मिलता है, जबकि केंद्र में उन्हें नौकरशाही के सख्त ढांचे में काम करना पड़ता है।
2. पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण: केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान अधिकारियों को अपने परिवार से दूर जाना पड़ता है, जिससे कई अधिकारी इसे प्राथमिकता नहीं देते।
3. राजनीतिक कारण: कई अधिकारी राज्य सरकारों के करीबी बनकर वहीं सेवा देना चाहते हैं और केंद्र में काम करने से बचते हैं।
4. कठिन कार्य परिस्थितियां: केंद्र सरकार में निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया जटिल होती है और अधिकारियों को कई स्तरों की जवाबदेही निभानी पड़ती है।
भविष्य की राह:
सरकार के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अब संयुक्त सचिव पद पर उन्हीं अधिकारियों को मौका मिलेगा जो केंद्र सरकार में सेवा देने के इच्छुक हैं और जिन्होंने न्यूनतम आवश्यक अनुभव प्राप्त किया है।
एक वरिष्ठ नौकरशाह के अनुसार, “अगर आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार में सेवा नहीं देंगे, तो नीति-निर्माण में राज्यों का दृष्टिकोण नहीं आ पाएगा। यह सरकार की एक सही रणनीति है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि अधिकारी केंद्र और राज्य, दोनों में संतुलित अनुभव प्राप्त करें।”
सरकार की यह नीति भविष्य में आईएएस अधिकारियों के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को अनिवार्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले वर्षों में क्या अधिकारी इस दिशा में अधिक रुचि दिखाते हैं, या फिर सरकार को और सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।












