निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मियों का विरोध, निदेशक वित्त के सेवा विस्तार को बताया अवैधानिक

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वित्त निधि नारंग को अवैधानिक रूप से सेवा विस्तार दिए जाने की निंदा करते हुए इसे निजीकरण को बढ़ावा देने की साजिश करार दिया है।
संघर्ष समिति के अनुसार, निदेशक वित्त को पहले ही निजीकरण का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था और अब उन्हें अनिश्चितकाल तक सेवा विस्तार दिया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। समिति ने सवाल उठाया कि निजीकरण में कितना समय लगेगा, यह निश्चित नहीं है, तो क्या उन्हें अनिश्चित काल तक पद पर बनाए रखा जाएगा?
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निधि नारंग का मौजूदा कार्यकाल 17 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। इसके बावजूद, उन्हें अवैधानिक रूप से सेवा विस्तार दिया जा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे फरवरी 2024 में 62 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद किया गया था।
अवैध नियुक्तियों का आरोप
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि जुलाई 2024 में निधि नारंग को निदेशक वाणिज्य का अतिरिक्त प्रभार दिया गया, जबकि इस पद के लिए इंजीनियरिंग में स्नातक होना अनिवार्य है। नारंग के पास यह योग्यता नहीं होने के बावजूद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई, जो पूरी तरह अवैधानिक है।
संघर्ष समिति के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन निजीकरण को किसी भी कीमत पर लागू करने के लिए नियमों की अनदेखी कर रहा है और निजी क्षेत्र से मिलीभगत के चलते संदेह के घेरे में है।
प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि प्रदेशभर में 13 फरवरी को विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। समिति ने दोहराया कि किसी भी कीमत पर निजीकरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के इस कड़े रुख से साफ है कि उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।












