नजीबाबाद में टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद: अधिशासी अभियंता और ठेकेदार आमने-सामने

रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
नजीबाबाद। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की टेंडर प्रक्रिया को लेकर अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) शैलेंद्र कुमार सारस्वत और ठेकेदार सौरभ तोमर के बीच विवाद गहरा गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाते हुए पुलिस और प्रशासन से शिकायत की है। इस प्रकरण ने न केवल विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को भी उजागर किया है।
ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद ऑफलाइन टेंडर पर विवाद
पीडब्ल्यूडी में समस्त टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद कुछ टेंडरों को ऑफलाइन करने का मामला इस विवाद की जड़ बना। अधिशासी अभियंता शैलेंद्र कुमार सारस्वत ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि ठेकेदार सौरभ तोमर ने टेंडर देने का दबाव बनाते हुए उनके साथ अभद्रता की। इसके बाद ठेकेदार और उसके पिता ने कार्यालय में हंगामा किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। अभियंता ने पिता-पुत्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ठेकेदार ने डीएम से की शिकायत
दूसरी ओर, ठेकेदार सौरभ तोमर ने जिलाधिकारी (डीएम) को शिकायत भेजते हुए एक्सईएन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ठेकेदार का कहना है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होनी थी, लेकिन कुछ टेंडर ऑफलाइन कर दिए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। जब वह अपनी शिकायत लेकर अधिशासी अभियंता के पास गया तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया।
डिप्लोमा इंजीनियर संघ की भी नाराजगी
इस विवाद के बीच डिप्लोमा इंजीनियर संघ भी अधिशासी अभियंता के व्यवहार को लेकर नाराजगी जता चुका है। संघ ने पहले भी अवर अभियंताओं के साथ अमर्यादित व्यवहार को लेकर विरोध दर्ज कराया था और ज्ञापन सौंपा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग के भीतर भी अधिकारी और कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं।
मामले के प्रभाव और संभावित परिणाम
यह विवाद केवल दो पक्षों के बीच का नहीं है, बल्कि यह विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के बड़े मुद्दे को सामने लाता है। ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद टेंडर ऑफलाइन किए जाने का मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
- यदि ठेकेदार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करेगा और उच्च अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
- यदि अधिशासी अभियंता की शिकायत सही साबित होती है, तो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दबाव बनाने की प्रवृत्ति पर कार्रवाई हो सकती है।
- डिप्लोमा इंजीनियर संघ की नाराजगी को देखते हुए विभाग के भीतर भी असंतोष है, जो भविष्य में किसी बड़े विरोध का रूप ले सकता है।
नजीबाबाद का यह प्रकरण सिर्फ एक विभागीय विवाद नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा है। आवश्यक है कि उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों को टाला जा सके और सरकारी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चल सकें।












