कार्तिक पूर्णिमा मेला 2026:
विदुर कुटी घाट पर उमड़ेगा आस्था का महासंगम, बिजनौर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद; ADM प्रशासन को मिली कमान
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | अवनीश त्यागी TargetTvLive
बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। आस्था, परंपरा और जन-जन के अटूट विश्वास का प्रतीक ऐतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला 2026 इस वर्ष अत्यंत भव्य और सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित होने जा रहा है। ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाले दरानगर गंज स्थित विदुर कुटी घाट पर आगामी 20 नवंबर से 24 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस 5 दिवसीय महापर्व को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।
लाखों श्रद्धालुओं की आमद, सुरक्षा चुनौतियों और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि मेला परिसर में शांति, सुरक्षा और सौहार्दपूर्ण वातावरण से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
ADM (प्रशासन) बनी मेले की ‘सुपर बॉस’, अभेद्य सुरक्षा का रोडमैप तैयार
जनपद भर में आयोजित होने वाले मेलों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) को पूरे बिजनौर जिले के मेलों का वरिष्ठ प्रभारी (नोडल अधिकारी) नियुक्त किया है। एडीएम (प्रशासन) को सभी मेला स्थलों पर आवश्यकतानुसार मजिस्ट्रेटों की तैनाती करने और भारी पुलिस बल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के आदेश दिए गए हैं, ताकि कानून एवं शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम रहे।
सुरक्षा के रणनीतिक खाके के तहत किसी भी प्रकार की अराजकता या अफवाह को रोकने के लिए खुफिया तंत्र और डिजिटल निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, जिला पंचायत और सिंचाई विभाग के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
विदुर कुटी से खो बैराज तक: बिजनौर के प्रमुख घाटों पर चाक-चौबंद होंगी व्यवस्थाएं
बिजनौर जनपद में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक विशाल सांस्कृतिक महापर्व का रूप ले लेता है। मुख्य मेला स्थल विदुर कुटी घाट (दरानगर गंज) पर जहां भारी यातायात नियंत्रण, अस्थायी टेंट सिटी, प्रकाश व्यवस्था और मजबूत बैरिकेडिंग की तैयारी है, वहीं जिले के अन्य प्रमुख घाटों पर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
बालावाली घाट पर नदी के गहरे जल क्षेत्रों में बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती और पुलिस गश्त बढ़ाई जा रही है। नांगल एवं जलालपुर घाट पर स्थानीय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश व निकास मार्गों को अलग-अलग किया जा रहा है। इसके अलावा गंगा बैराज और भूतपुरी में चेकपोस्ट निर्माण, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी और चिकित्सा शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि खो बैराज पर जल प्रवाह की निगरानी, नावों की जांच और लाइफ जैकेट की अनिवार्यता सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशासनिक मुस्तैदी का विश्लेषण: क्यों अहम है इस बार का प्रबंधन?
TargetTvLive के विशेष विश्लेषण के अनुसार, हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बिजनौर के गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। इतने बड़े पैमाने पर जनसमूह के जुटने से भगदड़ और अव्यवस्था का जोखिम बना रहता है, जिसे देखते हुए एडीएम (प्रशासन) को शीर्ष जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि प्रशासनिक नियंत्रण केंद्रीयकृत और त्वरित रहे।
नदियों में जलस्तर और गहरे गड्ढों को चिह्नित कर जल पुलिस व एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती अनिवार्य की जा रही है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, चल शौचालय, पर्याप्त रोशनी और प्राथमिक चिकित्सा शिविरों के गठन पर प्रशासन सीधे नजर बनाए हुए है।
जिलाधिकारी का कड़ा संदेश: “सौहार्द और सुरक्षा से समझौता नहीं”
जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि सभी मेला स्थलों पर प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था समुचित रूप से सुनिश्चित की जाए और संबंधित अधिकारियों के मध्य आवश्यक समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ मेले की पवित्रता और शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
TargetTvLive की सलाह (श्रद्धालुओं के लिए विशेष)
- केवल चिह्नित एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें।
- प्रशासन द्वारा निर्धारित बैरिकेडिंग और गहरे जल के चेतावनी संकेतों का पालन करें।
- मेले में बच्चों और बुजुर्गों की जेब में उनके नाम व संपर्क नंबर का पर्चा अवश्य रखें।
- किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस बूथ या ड्यूटी मजिस्ट्रेट को दें।












