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अवैध निर्माण पर ‘सिस्टम’ नापने लगे DM : धामपुर JE को ऑन-द-स्पॉट नोटिस, बुलडोजर कार्रवाई के संकेत से हड़कंप!

बिजनौर में अवैध निर्माण पर ‘सिस्टम’ नापने लगे डीएम: धामपुर JE को ऑन-द-स्पॉट नोटिस, बुलडोजर कार्रवाई के संकेत से हड़कंप!

अवनीश त्यागी, TargetTvLive

बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में अनियोजित और अवैध निर्माण के जरिए सरकारी राजस्व और नियमों को ठेंगा दिखाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब सीधा मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित ‘विनियमित क्षेत्र’ (Regulated Area) की हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक महज कागजी खानापूर्ति साबित नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक चाबुक चलने का गवाह बनी। बैठक के दौरान धामपुर क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माण की पोल खुलते ही डीएम का पारा चढ़ गया और उन्होंने मौके पर ही संबंधित अवर अभियंता (JE) की नकेल कसते हुए नोटिस जारी करने का फरमान सुना दिया।

प्रशासन के इस अप्रत्याशित और आक्रामक रुख के बाद से ही भू-माफियाओं के साथ-साथ सेटिंग-गेट-अप के खेल में लिप्त विभागीय अमले में भी अफरा-तफरी का माहौल है।

धामपुर केस: जब कटघरे में आए जेई, एसडीएम को दिए सख्त निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान जैसे ही तहसीलवार फाइलों का अंबार खुला, तहसील धामपुर के विनियमित क्षेत्र से जुड़ा अवैध निर्माण का एक पेचीदा मामला पटल पर आया। निर्माण की आड़ में नियमों के खुले उल्लंघन पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने तल्ख लहजे में उप जिलाधिकारी (SDM) धामपुर को निर्देश दिया:

  • तत्काल कारण बताओ नोटिस: संबंधित क्षेत्र के अवर अभियंता (जेई) को तुरंत नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाए।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: विनियमित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध ढांचा खड़ा होना सीधे तौर पर मैदानी स्टाफ की मिलीभगत या घोर लापरवाही का नतीजा है।
  • शून्य ढिलाई नीति: निर्माण से जुड़े मास्टर प्लान और कानूनी मानकों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार या लापरवाह अफसर को बख्शा नहीं जाएगा।

अदालती तेवर में हुई सुनवाई: वकीलों के सामने खुले राज

कलक्ट्रेट में हुई इस मैराथन बैठक की खासियत यह रही कि यह बंद कमरे की औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही। बैठक में विभिन्न विवादास्पद प्रकरणों के प्रतिवादियों और पक्षकारों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता भी दलीलों के साथ मौजूद रहे।

डीएम ने एक-एक बिंदु पर वकीलों के तर्कों को सुना, पत्रावलियों और नक्शों का मौके पर ही मिलान किया और फिर प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी पेंडिंग केस में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कानून के दायरे में रहकर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के स्पष्ट आदेश दिए गए।

विश्लेषणात्मक नजरिया: बिजनौर में अब ‘जीरो टॉलरेंस’ का दौर?

TargetTvLive के विशेष विश्लेषण के अनुसार, बिजनौर जिला प्रशासन का यह सख्त रुख सिर्फ एक अधिकारी को नोटिस देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले में भू-माफिया और भ्रष्ट अफसरशाही के बीच के गठजोड़ पर करारी चोट है। अक्सर देखा जाता है कि विनियमित क्षेत्रों में बिना ले-आउट पास कराए बहुमंजिला इमारतें और व्यावसायिक परिसर खड़े हो जाते हैं और स्थानीय जेई आंखें मूंदे रहते हैं।

जिलाधिकारी द्वारा सीधे फील्ड ऑफिसर की गर्दन पकड़ने से जिलेभर की तहसीलों में एक कड़ा संदेश गया है—यदि निर्माण अवैध हुआ, तो गाज सबसे पहले जिम्मेदार अफसर पर ही गिरेगी।

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