दशकों से ‘मौत का जाम’ ढाल रहे शराब माफिया! लीक होती रेड, दागी सिस्टम और जंगलों की ओट.. आखिर क्यों नहीं थमता यह खूनी कारोबार?
बिजनौर के बढ़ापुर में 1500 लीटर लहन नष्ट होने के बाद भी मुख्य माफिया फरार। अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट – जानिए दशकों से क्यों नहीं रुक पा रहा यह जानलेवा खेल
बिजनौर (TargetTvLive): सरकारें बदलीं, जिले के कप्तान बदले, आबकारी अधिकारी बदले, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह है बिजनौर के वन क्षेत्रों में धधकती ‘मौत की भट्ठियां’। हाल ही में थाना बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम मदपुरी के घने जंगलों में पुलिस, आबकारी और राजस्व टीम ने संयुक्त छापेमारी कर करीब 1500 लीटर लहन और उपकरण नष्ट किए।
कागजों पर इसे एक ‘सफल कार्रवाई’ दिखाया जा सकता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि दशकों से चल रहा यह जहरीली व अवैध शराब का कारोबार आज भी बदस्तूर जारी है। हर बार की तरह इस बार भी मौके से मुख्य तस्कर गायब मिले, जिससे एक बार फिर साबित हो गया कि सिस्टम में बैठा ‘दीमक’ इस खूनी खेल को ऑक्सीजन दे रहा है।
दशकों से क्यों नहीं रुक पा रहा यह जहरीला खेल? (TargetTvLive की एक्सक्लूसिव पड़ताल)
TargetTvLive की गहन पड़ताल से सामने आए वे मुख्य कारण, जिनकी वजह से यह अवैध कारोबार दशकों बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है:
1. रेड से पहले ‘लीक’ होती गोपनीय जानकारी
माफियाओं का अपना कोई खुफिया तंत्र नहीं होता, बल्कि विभाग के भीतर बैठे भ्रष्ट कारिंदे ही उनके सबसे बड़े ‘मुखबिर’ हैं। दशकों से यह पैटर्न चला आ रहा है—जब भी किसी बड़े सर्च ऑपरेशन की फाइल हिलती है, अंदरखाने की गोपनीय सूचना माफिया तक पहुंच जाती है। पुलिस के पहुंचने से पहले ही भट्ठियां ठंडी कर तस्कर सुरक्षित ठिकानों पर खिसक जाते हैं।
2. केवल ‘लहन’ बहाने की रस्म अदायगी
दशकों से हर रेड का परिणाम एक जैसा ही देखने को मिलता है। टीम जंगल में जाती है, ड्रमों में भरा लहन उड़ेलती है, तस्वीरें खिंचवाती है और लौट आती है। जब तक शराब के असली सिंडिकेट, फाइनेंसरों और मास्टरमाइंड्स को जेल के सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक 1500 लीटर लहन नष्ट करने से इस अवैध तंत्र को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
3. कर्मचारियों की आंतरिक निगरानी का न होना
ऑपरेशन में शामिल निचले स्तर के कर्मचारियों और मुखबिरों की कभी आंतरिक जांच (Internal Audit/Monitoring) नहीं होती। यही वजह है कि माफिया और महकमे के कुछ कर्मचारियों के बीच दशकों पुराना ‘नापाक गठजोड़’ लगातार मजबूत होता गया है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती: अब सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा
ग्राम मदपुरी के जंगलों में नायब तहसीलदार श्याम सुन्दर, आबकारी निरीक्षक देवेश कुमार सोती और थानाध्यक्ष बढ़ापुर धर्मेन्द्र कुमार की अगुवाई वाली टीम ने जो कार्रवाई की, वह निसंदेह सराहनीय प्रयास है। लेकिन दशकों पुरानी इस समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए बिजनौर प्रशासन को अब लीक से हटकर सख्त कदम उठाने होंगे:
- विभागीय सफाई (Internal Cleansing): रेड की सूचना लीक करने वाले ‘काले भेड़ों’ को चिन्हित कर उन पर बर्खास्तगी और आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई हो।
- गोपनीयता और सरप्राइज रेड: अभियानों में स्थानीय निचले अमले को ऐन वक्त पर शामिल किया जाए ताकि सूचना लीक न हो सके।
- संपत्ति जब्ती: अवैध शराब कारोबार में लिप्त चिन्हित माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई की जाए।
TargetTvLive का कड़ा नज़रिया
जहरीली शराब का यह कारोबार सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि हजारों मासूम जिंदगियों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। दशकों से चल रही इस लापरवाही और मुखबिरी के खेल पर अगर अब भी पूर्ण विराम नहीं लगाया गया, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।
TargetTvLive आबकारी विभाग और बिजनौर पुलिस प्रशासन से यह सवाल पूछता है—आखिर कब तक ‘सूचना लीक’ के नाम पर माफिया बचते रहेंगे और कब होगी विभाग के भीतर छिपे भेदियों पर ठोस कार्रवाई?
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