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‘फ्रेंडशिप क्लब’ के नाम पर लूट का खेल! पहले प्यार का झांसा, फिर सुनसान जगह पर वार

‘ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब’ के नाम पर लूट का बड़ा खुलासा! महिलाओं को बनाया हथियार, फर्जी दोस्ती के जाल में फंसाकर करते थे वार

Noida Crime News: दोस्ती का झांसा, सुनसान जगह पर बुलावा और फिर लूट… पुलिस ने ऐसे किया हाईटेक गैंग का पर्दाफाश

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा में साइबर और संगठित अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऑनलाइन “फ्रेंडशिप क्लब” के नाम पर लोगों को प्रेम और दोस्ती का झांसा देकर सुनसान स्थानों पर बुलाया जाता था और फिर महिलाओं की मदद से उन्हें लूट लिया जाता था। सेक्टर-24 थाना पुलिस ने इस हाईटेक गैंग का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की एक टोयोटा फॉर्च्यूनर, वारदात में इस्तेमाल की गई दो अन्य कारें और एक चाकू बरामद किया है। शुरुआती जांच में गैंग द्वारा कई वारदातों को अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है।

गुप्त सूचना पर पुलिस की सटीक कार्रवाई

एडिशनल डीसीपी (नोएडा) मनीषा सिंह के अनुसार, शनिवार को गुप्त सूचना मिलने पर सेक्टर-24 पुलिस ने सेक्टर-54 स्थित खेलगांव पार्क के पास घेराबंदी कर गैंग के सदस्यों को दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओमवीर यादव (फिरोजाबाद), मंजेश यादव (मैनपुरी), निधि यादव (औरैया), प्रियंका यादव (फिरोजाबाद) तथा काजल उर्फ रिया यादव (मैनपुरी) के रूप में हुई है। एक नाबालिग को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।

ऐसे बिछाते थे दोस्ती का जाल

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने एक फर्जी ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब तैयार किया था। विभिन्न माध्यमों से लोगों के मोबाइल नंबर जुटाकर उनसे दोस्ती की जाती थी। जब पीड़ित पूरी तरह भरोसा कर लेता था, तब उसे दिल्ली, नोएडा या एनसीआर के किसी सुनसान स्थान पर मिलने के लिए बुलाया जाता था।

गैंग दो कारों में मौके पर पहुंचता था। पहली कार में एक महिला और उसके साथी रहते थे, जबकि दूसरी कार कुछ दूरी पर खड़ी रहती थी। महिला बातचीत के बहाने पीड़ित को अपनी कार में बैठाकर सुनसान इलाके में ले जाती थी। इसके बाद गैंग के अन्य सदस्य वहां पहुंचकर पीड़ित को धमकाते, मारपीट करते और नकदी, मोबाइल, कार व अन्य कीमती सामान लूटकर फरार हो जाते थे।

महिलाओं का इस्तेमाल बना गैंग की सबसे बड़ी चाल

जांच में सामने आया है कि गैंग ने महिलाओं को अपने अपराध का सबसे बड़ा हथियार बनाया था। अधिकांश लोग महिला पर आसानी से भरोसा कर लेते थे, जिसका फायदा उठाकर गैंग वारदात को अंजाम देता था। यही वजह रही कि कई पीड़ित बिना किसी संदेह के उनके जाल में फंस गए।

पुलिस कर रही है पुराने मामलों की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गैंग ने अब तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है। आशंका है कि गैंग के तार एनसीआर के अन्य इलाकों से भी जुड़े हो सकते हैं।

विश्लेषण

यह घटना केवल लूट का मामला नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन फ्रेंडशिप के नाम पर बढ़ते संगठित अपराध की गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती करना, निजी जानकारी साझा करना या पहली मुलाकात सुनसान स्थान पर तय करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पुलिस भी लगातार लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देने की अपील कर रही है।

सावधानी ही सुरक्षा

  • किसी भी अनजान ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब पर भरोसा न करें।
  • पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर करें।
  • अपनी लोकेशन और मुलाकात की जानकारी परिवार या मित्रों को दें।
  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।

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