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“नेताओं की परिक्रमा ने खत्म कर दी ताकत”—राजपूत समाज को राघवेंद्र राजू की कड़ी चेतावनी

“पराक्रम भूल राजपूत परिक्रमा में, इसलिए नहीं हो रहा विकास” — राघवेंद्र सिंह राजू का बड़ा बयान

#TargetTvLive | ग्रेटर नोएडा | रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान

ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक महत्वपूर्ण सभा में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू ने राजपूत समाज और सरकारों को लेकर तीखा और बेबाक बयान दिया। उन्होंने कहा कि “आज तक किसी भी सरकार में क्षत्रियों का वास्तविक अस्तित्व नहीं रहा, और मौजूदा सरकार भी इस मामले में अलग नहीं है।”

“अब समझाने का नहीं, ताकत पहचानने का समय”

सभा को संबोधित करते हुए राजू ने कहा कि अब समय केवल संवाद का नहीं बल्कि आत्मशक्ति को पहचानने का है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा—

“हम पराक्रम को भूलकर नेताओं की परिक्रमा करने लगे हैं, यही कारण है कि राजपूत समाज का विकास नहीं हो पा रहा।”

उन्होंने समाज के भीतर बढ़ते बिखराव और मनभेद को सबसे बड़ी चुनौती बताया और इसे खत्म करने का आह्वान किया।

“हर बार दबे, हर बार मौन रहे — यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी”

TargetTvLive से फोन पर बातचीत में राघवेंद्र सिंह राजू ने स्वीकार किया कि समाज की चुप्पी ही उसकी कमजोरी रही है—

  • जब-जब समाज को दबाया गया, विरोध नहीं हुआ
  • अपने इतिहास और गौरव पर सवाल उठे, तब भी मौन साधा गया
  • जनप्रतिनिधियों ने भी खुलकर आवाज नहीं उठाई

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आज समाज को अपेक्षित सम्मान और तवज्जो नहीं मिल रही।

इतिहास का हवाला: “अधूरी लड़ाइयों का परिणाम”

राजू ने कहा कि राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को बार-बार तोड़ा-मरोड़ा गया। उन्होंने राणा सांगा, मिहिर भोज, आल्हा-ऊदल, अनंगपाल तोमर, पृथ्वीराज चौहान जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा—

“हमने हर लड़ाई लड़ी, लेकिन उसे अधूरा छोड़ दिया। यही हमारी सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल है।”

फिल्मों पर भी साधा निशाना

उन्होंने कहा कि जोधा-अकबर और पद्मावत जैसी फिल्मों में राजपूत इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन समाज और उसके नेताओं ने प्रभावी विरोध नहीं किया।

UGC कानून पर संघर्ष जारी

राघवेंद्र सिंह राजू ने बताया कि यूजीसी कानून के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर स्टे बरकरार है, जिसमें अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के डॉ. एपी सिंह की अहम भूमिका रही।
उन्होंने कहा—

“जब तक सरकार यह कानून वापस नहीं लेती, तब तक सवर्ण समाज, सनातन योद्धा और हिंदुत्व समर्थकों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।”

दिनकर का दोहा सुनाकर दिया संदेश

राजू ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए समाज को चेताया—

“नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।”

उन्होंने कहा कि मौन रहना भी अपराध है, और यही समाज की सबसे बड़ी चूक रही।

संविधान और आत्ममंथन पर अपील

संविधान निर्माण को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि इसमें केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि 242 सदस्यों की भागीदारी थी।

अंत में उन्होंने राजपूत समाज से आत्ममंथन की अपील करते हुए कहा—

“अगर हम भगवान राम और महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलते, तो आज यह स्थिति नहीं होती। अब समय है एकजुट होकर अपनी पहचान और अधिकार के लिए खड़े होने का।”

 निष्कर्ष

राघवेंद्र सिंह राजू का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा सकता है, बल्कि राजपूत समाज के भीतर भी आत्मचिंतन और एकजुटता की नई बहस को जन्म दे सकता है।

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