‘कानून वापस लो वरना आंदोलन तेज होगा!’— नोएडा से क्षत्रिय महासभा का बिगुल, राम मंदिर ट्रस्ट में हिस्सेदारी की भी मांग

रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान| TargetTvLive
ग्रेटर नोएडा। यूजीसी कानून को लेकर देशभर में सियासी और सामाजिक हलचल के बीच अब अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू ने नोएडा में साफ शब्दों में ऐलान किया—
👉 “जब तक यूजीसी कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक क्षत्रिय समाज का संघर्ष थमने वाला नहीं है।”
यह बयान उस समय आया है जब समाज को एकजुट करने के लिए ‘क्षत्रिय जोड़ो आंदोलन यात्रा’ तेज गति से आगे बढ़ रही है।
नोएडा से राष्ट्रीय आंदोलन का संकेत
नोएडा में आयोजित सभा में बड़ी संख्या में क्षत्रिय समाज के लोगों को संबोधित करते हुए राजू ने कहा कि अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाएगा।
उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही गुजरात और उत्तराखंड में बड़ी सभाएं आयोजित कर इस मुद्दे को और तेज किया जाएगा।
यूसीसी पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे बना बड़ा मुद्दा
राजू ने कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्टे लागू है, ऐसे में किसी भी राज्य द्वारा इसे लागू करना संभव नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए विवादित कानूनों पर पुनर्विचार किया जाए।
राम मंदिर ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व की जोरदार मांग
सभा में एक अहम मुद्दा उठाते हुए राजू ने कहा—
👉 “राम मंदिर ट्रस्ट में क्षत्रिय समाज या अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का एक सदस्य जरूर होना चाहिए।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समाज केवल राजनीतिक दलों के भरोसे नहीं रहेगा, बल्कि अपनी ताकत के दम पर अधिकार हासिल करेगा।
अमरावती एजेंडा: बड़े फैसलों की तैयारी
राजू ने बताया कि महाराष्ट्र के अमरावती में हुई बैठक में कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनी, जिनमें शामिल हैं—
- जनसंख्या नियंत्रण कानून
- समान नागरिक संहिता
- जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने की मांग
- क्षत्रिय उत्थान आयोग का गठन
- पिछड़े क्षत्रियों को जोड़ने का अभियान
- दहेज मुक्त सामूहिक विवाह
- युवा संस्कार शिविर
👉 इन फैसलों से साफ है कि महासभा अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि वैकल्पिक सामाजिक एजेंडा भी तैयार कर रही है।
पुराने आंदोलनों का जिक्र कर दिखाया दम
राजू ने संगठन की ताकत गिनाते हुए कहा कि—
- CAA का समर्थन
- धारा 370 और 35A हटाने का समर्थन
- जोधा-अकबर और पद्मावत फिल्मों का विरोध
जैसे कई मुद्दों पर महासभा पहले भी अग्रणी भूमिका निभा चुकी है।
उन्होंने कहा— “हम सच बोलने और लड़ने का साहस रखते हैं।”
एकता पर फोकस—सभी संगठनों को जोड़ने की अपील
राजू ने चिंता जताई कि देशभर में एक जैसे नाम से कई संगठन काम कर रहे हैं।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि सभी को मिलाकर एक संयुक्त कमेटी बनाई जाए, जिससे समाज को मजबूत दिशा मिल सके।
राजनीतिक हिस्सेदारी पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि देश में 131 लोकसभा और 1225 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं, जहां क्षत्रिय चुनाव नहीं लड़ सकते।
इसके बावजूद समाज के लिए अब तक कोई आयोग या विशेष योजना नहीं बनाई गई, जो एक गंभीर मुद्दा है।
समाज से सीधी अपील
कार्यक्रम के अंत में राजू ने समाज से आह्वान किया—
👉 “समझदारी, जिम्मेदारी, वफादारी और ईमानदारी के साथ संगठन से जुड़ें और इसे मजबूत करें।”
विश्लेषण: आंदोलन की आक्रामक रणनीति
नोएडा की यह सभा संकेत देती है कि क्षत्रिय महासभा अब केवल सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली दबाव समूह के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है।
यूजीसी कानून के विरोध के साथ-साथ राम मंदिर ट्रस्ट में हिस्सेदारी की मांग इस आंदोलन को और ज्यादा राजनीतिक और संवेदनशील बना रही है।
आने वाले समय में गुजरात और उत्तराखंड की सभाएं तय करेंगी कि यह आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है।
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