“क्षत्रिय समाज में फूट पर फूटा गुस्सा! ओमप्रकाश चौहान बोले—जो साथ नहीं देगा, उसे वोट नहीं मिलेगा”

UGC कानून के खिलाफ आंदोलन का ऐलान, क्षत्रिय समाज की एकजुटता पर जोर
ग्रेटर नोएडा | विशेष संवाददाता

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर जीटा-1 स्थित श्री आशीर्वाद प्लेस में रविवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट की मासिक बैठक ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों ने भाग लिया और समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
यह बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसमें समाज की वर्तमान स्थिति, युवाओं के भविष्य और राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़े फैसले लिए गए।
“सच्चा क्षत्रिय वही, जो समाज के लिए खड़ा हो” — ओमप्रकाश चौहान
बैठक को संबोधित करते हुए समाजसेवी एवं वीर कुंवर सिंह शोध संस्थान के संस्थापक सदस्य व मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश चौहान ने बेबाक अंदाज में कहा:
“आज हमारा समाज पिछड़ रहा है क्योंकि हम एक-दूसरे का साथ नहीं देते। अगर हमें अपने युवाओं को आगे बढ़ाना है, तो आपसी सहयोग और एकजुटता को मजबूत करना होगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाए।
UGC कानून बना सबसे बड़ा मुद्दा, विरोध प्रदर्शन की रणनीति तैयार
बैठक में UGC कानून को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए निम्न निर्णय लिए:
- कानून के खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा
- सांसदों और विधायकों से खुलकर समर्थन मांगा जाएगा
- जो जनप्रतिनिधि समाज का साथ नहीं देंगे, उन्हें चुनाव में सबक सिखाया जाएगा
यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि संगठन अब सामाजिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
पृथ्वीराज चौहान जयंती का भव्य आयोजन, संगठन विस्तार पर जोर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस वर्ष वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान की जयंती ग्रेटर नोएडा में भव्य रूप से मनाई जाएगी। इसके साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर विस्तार अभियान चलाने की योजना बनाई गई।
संगठन में बड़ा बदलाव, नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं
बैठक के दौरान संगठन को मजबूत करने के लिए अहम नियुक्तियां की गईं:
- समरपाल सिंह चौहान को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया
इसके अलावा बैठक में कई प्रमुख पदाधिकारी और समाजसेवी मौजूद रहे, जिनमें डॉ. ऋषिपाल सिंह परमार, कर्नल चमन सिंह सिसोदिया, रामदेव रावल, बिजेंद्र सिंह रावल, अरविंद चौहान, देवेंद्र भदौरिया, ओपी सिंह, राजीव ठाकुर, रोहित सिंह शेखावत, अनिल कुमार सिंह, हरिओम सिंह, राजकुमार सिंह राजपूत, अजित राठौर और सुभाष चौहान शामिल रहे।
विश्लेषण: सामाजिक एकता से राजनीतिक दबाव तक—बदलती रणनीति
इस बैठक के निष्कर्ष कई बड़े संकेत देते हैं:
- 🔹 समाज के भीतर एकजुटता की कमी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है
- 🔹 युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर रणनीति बनाई जा रही है
- 🔹 संगठन अब राजनीतिक दबाव बनाने के लिए खुलकर सामने आ रहा है
स्पष्ट है कि आने वाले समय में क्षत्रिय समाज अपने मुद्दों को लेकर अधिक आक्रामक और संगठित रूप में सामने आ सकता है।
निष्कर्ष
ग्रेटर नोएडा की यह बैठक एक साधारण संगठनात्मक बैठक से कहीं ज्यादा साबित हुई। यह एक सामाजिक चेतना, राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति का संगम थी, जिसमें एकजुटता, संघर्ष और नेतृत्व की नई दिशा तय की गई।
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