अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर भड़की भाकियू: ‘किसान-विरोधी डील’ रद्द करने की मांग, 21 फरवरी को नूरपुर में महापंचायत का ऐलान
अमेरिका-भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन का देशव्यापी धरना-प्रदर्शन। भाकियू ने समझौते को किसान-विरोधी बताते हुए 21 फरवरी को नूरपुर में महापंचायत बुलाई। जानिए क्या हैं किसानों की प्रमुख आपत्तियां।
By Avnish Tyagi for Digital News Desk | 12 फरवरी 2026
देशभर में विरोध, भाकियू ने उठाए गंभीर सवाल
12 फरवरी 2026 को देशभर के किसान संगठनों ने प्रस्तावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने इस समझौते को “किसान-विरोधी” बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
भाकियू का कहना है कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि किसान की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ा प्रश्न है।
❓ बड़ा सवाल: क्या किसानों से ली गई सहमति?
भाकियू नेताओं ने पूछा है कि—
“क्या इस समझौते से पहले देश के किसानों से व्यापक परामर्श किया गया? क्या उनके हितों की सुरक्षा की गारंटी दी गई?”
संगठन का आरोप है कि समझौता ऐसे समय में आगे बढ़ाया जा रहा है जब किसान पहले से ही एमएसपी की कानूनी गारंटी और फसलों के उचित दाम की मांग कर रहे हैं।
भाकियू के 4 बड़े तर्क
1️⃣ सस्ती विदेशी उपज से असमान प्रतिस्पर्धा
अमेरिका की कृषि व्यवस्था भारी सब्सिडी, आधुनिक मशीनीकरण और कॉरपोरेट मॉडल पर आधारित है। यदि सोयाबीन, मक्का, दलहन और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम होता है, तो सस्ती विदेशी उपज भारतीय बाजार में आएगी।
इससे छोटे और सीमांत किसान असमान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे।
2️⃣ डेयरी सेक्टर पर सीधा असर
भारत का डेयरी मॉडल सहकारी ढांचे और छोटे किसानों पर आधारित है।
यदि अमेरिकी डेयरी उत्पादों को खुली छूट मिलती है, तो लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आय प्रभावित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा।
3️⃣ एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर संकट
भाकियू का दावा है कि व्यापार संतुलन के नाम पर कृषि सब्सिडी घटाने और सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव बनाया जा सकता है।
इससे एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और देश की खाद्य आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ सकती है।
4️⃣ बीज बाजार पर कॉरपोरेट नियंत्रण
संगठन का आरोप है कि अमेरिकी कंपनियां पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों के जरिए बीज बाजार को नियंत्रित करती हैं।
ऐसे प्रावधान लागू होने पर पारंपरिक बीज संरक्षण प्रणाली कमजोर होगी और किसानों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।
21 फरवरी को नूरपुर में महापंचायत
भाकियू ने 21 फरवरी को नूरपुर में महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत इस महासभा का नेतृत्व करेंगे।
जिला अध्यक्ष द्वारा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करें और अधिक से अधिक संख्या में शांतिपूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करें।
“किसान एकता ही हमारी शक्ति”
भाकियू नेताओं ने स्पष्ट कहा—
“जब तक खेत सुरक्षित नहीं, तब तक देश सुरक्षित नहीं।”
धरना-प्रदर्शन के दौरान सुनील कुमार प्रधान, जिला अध्यक्ष मनप्रीत सिंह, वावुराम तोमर, महेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, प्रमोद कुमार, आशु चौधरी, नितिन राणा, सोनू, राजीव चौहान, शैलेंद्र, अरुण कुमार, विजय, डॉ. पवन सिंह, कविराज धर्मवीर, मुनेंद्र काकरान, कुलदीप सिंह, ऋषिपाल सिंह, संदीप त्यागी, कल्याण सिंह, मुनेश कुमार, नरदेव सिंह, मुकेश कुमार, गौरव जंघाला, जितेंद्र सिंह, हरीराज सिंह, डॉ. विजय सिंह, प्रथम चौधरी, विनीत चौधरी, याकूब भाई, नीतू मौर्य, धीरज, अजीत, हनीफ, दिनेश कुमार, अशोक कुमार सहित अनेक किसान नेता मौजूद रहे।
विश्लेषण: क्या बढ़ेगा कृषि क्षेत्र में टकराव?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते पारदर्शिता और व्यापक परामर्श के बिना आगे बढ़ाए गए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ सकता है।
सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह वैश्विक व्यापार संतुलन और घरेलू कृषि सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाए।
अमेरिका-भारत व्यापार समझौता केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि देश की कृषि संरचना और ग्रामीण भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति और किसान आंदोलन के केंद्र में रह सकता है।
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