राष्ट्रपति ने क्यों चुना बिजनौर मॉडल? डीएम जसजीत कौर को राष्ट्रीय मतदाता पुरस्कार, जानिए SIR की पूरी कहानी

📍 बिजनौर | 25 जनवरी 2026 | अवनीश त्यागी की स्पेशल एनालिसिस रिपोर्ट
राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 पर बिजनौर ने देश के प्रशासनिक नक्शे पर अपनी अलग पहचान दर्ज करा दी। जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जसजीत कौर को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम में उत्कृष्ट ट्रेनिंग एवं कैपेसिटी बिल्डिंग मॉडल लागू करने के लिए राष्ट्रीय मतदाता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, बल्कि उस बिजनौर मॉडल का है, जिसने मतदाता सूची सुधार को कागज़ी प्रक्रिया से निकालकर ज़मीनी, पारदर्शी और भरोसेमंद अभियान बना दिया।
SIR क्या है और यह इतना अहम क्यों?
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाने वाली मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की सबसे संवेदनशील प्रक्रिया है।
यहीं से तय होता है कि कौन मतदाता है और कौन नहीं—जरा-सी चूक पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सकती है।
बिजनौर मॉडल: ट्रेनिंग को बनाया ताकत
बिजनौर प्रशासन ने SIR को एक “रूटीन सरकारी काम” की बजाय मानव क्षमता आधारित मिशन के रूप में लागू किया।
✔️ क्या किया गया खास?
- BLO और सुपरवाइजरों की गहन ट्रेनिंग
नियमों, फील्ड प्रैक्टिस और तकनीकी पहलुओं पर चरणबद्ध प्रशिक्षण - फील्ड से फीडबैक, तुरंत समाधान
शंकाओं और समस्याओं का रियल-टाइम समाधान - इंटर-डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन
राजस्व, शिक्षा, आईटी सहित कई विभागों की साझा भूमिका
नतीजा—काम रुका नहीं, गुणवत्ता गिरी नहीं और समय-सीमा टूटी नहीं।
राजनीतिक दलों को साथ लेकर बनी पारदर्शिता
अक्सर मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा सवाल राजनीतिक दलों की ओर से उठते हैं।
बिजनौर में इस चुनौती को अवसर में बदला गया।
- सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से नियमित संवाद
- समय-समय पर बैठकें और फीडबैक
- हर स्तर पर पारदर्शिता और भरोसा
इससे न केवल विवाद टले, बल्कि प्रक्रिया पर सार्वजनिक विश्वास भी मजबूत हुआ।
टीमवर्क + लीडरशिप = राष्ट्रीय पहचान
डीएम जसजीत कौर के नेतृत्व में यह साफ दिखा कि जब प्रशासनिक नेतृत्व स्पष्ट हो और टीम को सही दिशा मिले, तो नतीजे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचते हैं।
मानव संसाधन में किया गया निवेश, जवाबदेही और स्पष्ट कार्ययोजना—इन तीनों ने मिलकर बिजनौर को नेशनल बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल बना दिया।
क्यों खास है राष्ट्रपति का यह सम्मान?
राष्ट्रपति द्वारा दिया गया यह पुरस्कार सीधे तौर पर यह संदेश देता है कि—
लोकतंत्र को मजबूत करने वाले ज़मीनी प्रयास ही असली राष्ट्रनिर्माण हैं।
बिजनौर की यह सफलता आने वाले चुनावों और अन्य जिलों के लिए एक रोडमैप बनकर उभरी है।
बिजनौर बना लोकतांत्रिक भरोसे का ब्रांड
यह उपलब्धि बताती है कि ईमानदार मंशा, मजबूत ट्रेनिंग और सामूहिक प्रयास से प्रशासनिक सिस्टम को बदला जा सकता है।
बिजनौर अब सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि मतदाता सूची सुधार का भरोसेमंद ब्रांड बन चुका है।
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