राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026:
बिजनौर में लोकतंत्र का उत्सव, रैली से शपथ तक दिखी जनभागीदारी की ताकत

बिजनौर | डिजिटल डेस्क के अवनीश त्यागी की रिपोर्ट
राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 पर बिजनौर में लोकतंत्र केवल मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों से सभागार तक उसकी गूंज सुनाई दी। मतदाता जागरूकता रैली, सामूहिक शपथ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान समारोह—पूरे आयोजन ने यह संदेश साफ कर दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक जागरूक और सहभागी हों।
रैली से शुरुआत, संदेश स्पष्ट—मतदान जरूरी
सुबह 9 बजे लूईस पार्कर इंटर कॉलेज के मैदान से शुरू हुई स्कूली छात्र-छात्राओं की मतदाता जागरूकता रैली ने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए आमजन को मतदान के अधिकार और कर्तव्य की याद दिलाई। रैली का समापन इंदिरा बल भवन पर हुआ, जहां मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह दृश्य खुद में यह बताने के लिए काफी था कि लोकतांत्रिक शिक्षा की नींव स्कूल स्तर से ही रखी जा रही है।
दीप प्रज्वलन से लोकतंत्र की ज्योति प्रज्वलित
मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके साथ अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वान्या सिंह, उप जिलाधिकारी सदर रितु चौधरी, परियोजना निदेशक दिनकर विद्यार्थी सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और नागरिकों की मौजूदगी ने आयोजन को जनआंदोलन का रूप दिया।
सीडीओ का संदेश: पहचान पत्र सिर्फ वोट नहीं, अधिकारों की चाबी
अपने संबोधन में मुख्य विकास अधिकारी ने 25 जनवरी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना ने लोकतंत्र को संस्थागत मजबूती दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन पहचान पत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं, बल्कि यह सामाजिक और सरकारी योजनाओं में नागरिक की पहचान का सशक्त माध्यम है।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रेरक संदेश दिया—“किसी और जैसा बनने के बजाय, स्वयं से बेहतर बनने का प्रयास करें।” यह संदेश केवल चुनावी नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों से भी जुड़ा रहा।
शपथ ने जोड़ा विचार और व्यवहार
कार्यक्रम के सबसे प्रभावी क्षणों में से एक रहा सामूहिक मतदाता शपथ। अधिकारियों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने निर्भीक होकर, बिना किसी प्रलोभन के मतदान करने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करने का संकल्प लिया। यह शपथ केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी की सार्वजनिक घोषणा थी।
संस्कृति, जादू और संदेश—लोकतंत्र का रचनात्मक रूप
देशभक्ति गीतों, नाटकों और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने लोकतंत्र को रचनात्मक अभिव्यक्ति दी। जिले के प्रसिद्ध जादूगर एन.ए. पाशा की प्रस्तुति ने जहां दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं संदेश भी दिया कि जागरूकता मनोरंजन के साथ भी प्रभावी हो सकती है।
सम्मान और प्रोत्साहन: लोकतंत्र के सच्चे सिपाही सम्मानित
कार्यक्रम में वयोवृद्ध मतदाता एवं स्वतंत्रता सेनानी लेखराज सिंह को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही निर्वाचन कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सुपरवाइजर्स और बीएलओ को प्रशस्ति पत्र दिए गए। पूर्वदशम और दशमोत्तर कक्षा के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति स्वीकृति पत्र देकर शिक्षा और लोकतंत्र के बीच के रिश्ते को और मजबूत किया गया।
राष्ट्रीय स्तर का संदेश, स्थानीय असर
भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का वीडियो संदेश कार्यक्रम में दिखाया गया, जिसने यह स्पष्ट किया कि मतदाता जागरूकता केवल जिला या राज्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सरोकार है।
बिजनौर का यह आयोजन दिखाता है कि यदि प्रशासन, शिक्षा संस्थान और नागरिक एक साथ आएं, तो लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक चेतना बन सकता है। रैली से लेकर सम्मान समारोह तक, हर गतिविधि का एक ही उद्देश्य रहा—मतदान को अधिकार नहीं, आदत बनाना।
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