EPFO घोटाले पर शिकंजा: ₹1.28 करोड़ अटका, 18 मई तक नहीं जमा हुआ पैसा तो रुकेगा वेतन!
मनरेगा कर्मियों के हक पर लापरवाही भारी—बिजनौर प्रशासन का अल्टीमेटम, लेखाकारों पर सीधी कार्रवाई का आदेश
बिजनौर से बड़ी खबर | प्रशासन का सख्त एक्शन मोड
बिजनौर | 30 अप्रैल 2026
मनरेगा कर्मियों के भविष्य निधि (EPFO) को लेकर बिजनौर में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। महीनों से लंबित भुगतान और लगातार अनदेखी के बाद अब उपायुक्त (श्रम रोजगार) ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दे दी है—
👉 18 मई 2026 तक EPFO राशि जमा नहीं हुई, तो लेखाकारों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा।
यह आदेश न सिर्फ एक प्रशासनिक निर्देश है, बल्कि यह संकेत भी है कि अब कर्मचारियों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी।
₹1.28 करोड़ का बड़ा बकाया—कहां फंसा पैसा?
जांच में सामने आया है कि M/S Uttar Pradesh Gramin Rojgar Guarantee Yojna, DRDA बिजनौर के अंतर्गत
📌 ₹1,28,92,275 (करीब 1.28 करोड़ रुपए)
📌 अवधि: 01 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2024
का EPFO बकाया अब तक जमा नहीं कराया गया है।
इतना ही नहीं, यह राशि विकास खंडों के होल्डिंग खातों में पड़ी रही, लेकिन संबंधित कर्मचारियों के UAN खातों में ट्रांसफर नहीं हुई—जो सीधा-सीधा कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है।
बार-बार निर्देश, फिर भी ढिलाई—अब बर्दाश्त नहीं
जनवरी से अप्रैल 2026 तक कई बार पत्र जारी किए गए, लेकिन:
- विकास खंड स्तर पर लापरवाही जारी रही
- EPFO जमा करने में शिथिलता बरती गई
- कर्मचारियों के भविष्य को लेकर गंभीर उदासीनता दिखी
यही वजह है कि अब प्रशासन ने “नो एक्सक्यूज पॉलिसी” लागू कर दी है।
डेडलाइन फिक्स: 18 मई 2026
प्रशासन ने अंतिम समय सीमा तय करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
✔️ अप्रैल 2026 तक की सभी लंबित EPFO राशि
✔️ हर हाल में 18 मई 2026 तक UAN खातों में जमा होनी चाहिए
❗ अगर डेडलाइन मिस हुई तो—
👉 संबंधित विकास खंड के लेखाकारों का वेतन रोक दिया जाएगा
👉 आगे की कार्रवाई भी तय मानी जा रही है
किन कर्मचारियों पर पड़ा असर?
इस पूरे मामले से जुड़े हैं:
- ग्राम रोजगार सेवक
- कंप्यूटर ऑपरेटर
- तकनीकी सहायक
- अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी
- लेखा सहायक
यानी मनरेगा से जुड़े सैकड़ों संविदा कर्मचारी, जिनका भविष्य निधि पैसा महीनों से अटका हुआ था।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह आदेश कई बड़े सवाल और संकेत छोड़ता है:
🔸 1. सिस्टम की लापरवाही उजागर
विकास खंड स्तर पर वित्तीय अनुशासन की कमी साफ नजर आई।
🔸 2. कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी
EPFO जैसे संवेदनशील मुद्दे पर देरी, सीधे सामाजिक सुरक्षा पर चोट है।
🔸 3. जवाबदेही तय करने की शुरुआत
अब “किसी का नहीं, सबका हिसाब”—लेखाकारों को सीधा जिम्मेदार ठहराया गया।
🔸 4. भविष्य में बड़े एक्शन के संकेत
यह कदम आगे और बड़े वित्तीय ऑडिट और जांच की ओर इशारा करता है।
प्रशासन का सख्त संदेश
“समय सीमा में EPFO जमा करें, अन्यथा वेतन रुकना तय है।”
यह संदेश स्पष्ट करता है कि अब सरकारी योजनाओं में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
निष्कर्ष: अब नहीं चलेगी ढिलाई
बिजनौर में EPFO को लेकर उठाया गया यह कदम केवल एक जिला स्तरीय कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को चेतावनी है।
👉 अब मनरेगा जैसी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करना ही प्राथमिकता है।
अगर तय समय में पैसा जमा नहीं हुआ, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है—जिसमें विभागीय कार्रवाई से लेकर कानूनी प्रक्रिया तक शामिल हो सकती है।
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