अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी: फर्जीवाड़े के चलते प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र सिंह चौहान की सेवा समाप्त

बिजनौर: अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाने में गड़बड़ी करने के आरोप में प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र सिंह चौहान की सेवा समाप्त कर दी गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) बिजनौर ने जांच के बाद चौहान की नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध पाते हुए यह कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला
धर्मेंद्र सिंह चौहान, जो प्राथमिक विद्यालय लतीफपुर में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत थे, पर आरोप था कि उन्होंने अपने पिता बाबूराम सिंह की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की, जबकि उनकी माता भगवती देवी भी सरकारी सेवा में कार्यरत थीं। नियमानुसार, यदि माता-पिता में से एक जीवित और सरकारी सेवा में हो, तो अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती। शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर चौहान की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायत और जांच प्रक्रिया
शिकायत (IGRS संख्या 40013424021084) 5 सितंबर 2024 को दर्ज की गई थी। इस पर 6 सितंबर को धर्मेंद्र सिंह चौहान को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। 18 सितंबर को दिए गए अपने जवाब में चौहान ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता उनके खिलाफ द्वेष भावना रखता है और पैसों की मांग कर रहा है। हालांकि, उन्होंने अपनी नियुक्ति की वैधता को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
जब उनसे पूछा गया कि माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में रहने के बावजूद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति कैसे प्राप्त की, तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया और कहा कि उनके नियुक्ति संबंधी दस्तावेज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध हैं। इसके बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने विस्तृत जांच कराई।
जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई
खंड शिक्षा अधिकारी, अल्हैपुर से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर 9 जनवरी 2025 को BSA बिजनौर ने धर्मेंद्र सिंह चौहान की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, चौहान की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध पाई गई, क्योंकि माता-पिता में से एक सरकारी सेवा में कार्यरत था।
BSA ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जिलाधिकारी बिजनौर को भी रिपोर्ट भेजी गई है, ताकि वे आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर सकें।
क्या होगा आगे?
शिकायतकर्ता ने न केवल धर्मेंद्र सिंह चौहान की सेवा समाप्त करने की मांग की थी, बल्कि उनकी अवैध नियुक्ति के दौरान प्राप्त वेतन की रिकवरी की भी अपील की थी। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। यदि वेतन वसूली का आदेश दिया जाता है, तो चौहान को अब तक प्राप्त वेतन वापस करना पड़ सकता है।
बड़ा सवाल: कैसे हुई नियमों की अनदेखी
इस पूरे मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि धर्मेंद्र सिंह चौहान की नियुक्ति नियमों के खिलाफ थी, तो यह जांच का विषय है कि आखिर यह गड़बड़ी हुई कैसे? किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन अधिकारियों की भूमिका इसमें संदिग्ध है?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की अनुकंपा नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभी भी सख्त निगरानी और जवाबदेही की जरूरत है।












