मुरादाबाद: घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया सहायक आयुक्त, कार्यालय से 2.3 लाख बरामद

मुरादाबाद। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत विजिलेंस टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक आयुक्त औषधि मनु शंकर को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के दौरान उनके कार्यालय से 2.3 लाख रुपये की नकदी भी बरामद हुई, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
कैसे हुआ भंडाफोड़ ?
विजिलेंस टीम के अनुसार, मनु शंकर ने मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी करने के बदले 35,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। उन्होंने यह रकम दो किश्तों में लेने की योजना बनाई थी—पहली किश्त में 15,000 रुपये और दूसरी किश्त में 20,000 रुपये। शिकायतकर्ता ने इस अवैध मांग की जानकारी विजिलेंस एसपी बरेली को दी, जिसके बाद टीम ने ट्रैप तैयार कर अधिकारी को घूस लेते हुए पकड़ने की योजना बनाई।
कार्यालय से भारी नकदी बरामद
विजिलेंस अधिकारियों की छानबीन में मनु शंकर के कार्यालय से 1.3 लाख रुपये नकद मिले, जो 15,000 रुपये की घूस से अलग थे। इसके अलावा, 1-1 लाख रुपये के दो लिफाफे भी बरामद किए गए, जिनके स्रोत के बारे में अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। माना जा रहा है कि यह भी अवैध लेन-देन का हिस्सा हो सकता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और सवाल
यह मामला सरकारी तंत्र में गहरी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार को उजागर करता है। सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी एक आम समस्या बन गई है, जिससे आम नागरिकों को अपने कानूनी कार्य पूरे कराने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है।
इस घटना से तीन प्रमुख सवाल उठते हैं:
- क्या यह पहली बार हुआ, या पहले भी मनु शंकर इस तरह की गतिविधियों में लिप्त रहे हैं?
- क्या विभागीय अधिकारियों को इस घूसखोरी की पहले से कोई जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की?
- क्या इस मामले के बाद औषधि विभाग में बड़े स्तर पर जांच होगी, जिससे अन्य भ्रष्ट अधिकारियों की भी पोल खुल सके?
विजिलेंस की इस कार्रवाई ने न केवल एक भ्रष्ट अधिकारी को बेनकाब किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जनता की जागरूकता और सतर्कता भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। यदि शिकायतकर्ता आगे न आता, तो संभव था कि यह अवैध लेन-देन लगातार जारी रहता। अब देखना यह होगा कि इस मामले में विजिलेंस की जांच आगे क्या मोड़ लेती है और क्या औषधि विभाग में किसी बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क का पर्दाफाश होता है या नहीं।












