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अधिवक्ताओं के सम्मान में ‘रन फॉर एडवोकेट्स’ 800 किलोमीटर की दौड़ का साहसिक प्रयास

अधिवक्ताओं के सम्मान में ‘रन फॉर एडवोकेट्स’ 800 किलोमीटर की दौड़ का साहसिक प्रयास

BIJNOR. मुरादाबाद के प्रतिष्ठित अधिवक्ता और समाजसेवी, मयंक शर्मा, एक ऐतिहासिक और साहसिक पहल के लिए तैयार हैं। यह पहल ‘रन फॉर एडवोकेट्स’ नाम से शुरू की गई है, जिसमें मयंक शर्मा प्रयागराज से दिल्ली तक 800 किलोमीटर की दौड़ पूरी करेंगे। उनका यह प्रयास न केवल अधिवक्ताओं के सम्मान में समर्पित है, बल्कि इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने का भी उद्देश्य है।

दौड़ का मार्ग और विशेषताएं

मयंक शर्मा की यह दौड़ प्रयागराज से शुरू होकर लखनऊ, मुरादाबाद, हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद होते हुए दिल्ली में समाप्त होगी। यह साहसिक दौड़ 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के दिन शुरू होगी, जो न केवल एक ऐतिहासिक दिन है, बल्कि भारत के संविधान और अधिवक्ताओं के योगदान को भी सम्मानित करता है। इस पहल में मयंक शर्मा ने अब तक 13 हाफ मैराथन, 2 फुल मैराथन और 1 बार 50 किलोमीटर की दौड़ पूरी की है।

उद्देश्य और प्रेरणा

मयंक शर्मा ने अधिवक्ताओं के सम्मान को बढ़ाने और उनके योगदान को पहचान दिलाने के लिए यह दौड़ समर्पित की है। मयंक का कहना है कि अधिवक्ता समाज के स्तंभ हैं, और उनका यह प्रयास उनके प्रति आदर और प्रोत्साहन व्यक्त करने का एक माध्यम है।

व्यक्तिगत और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मयंक शर्मा का पैतृक गांव हसुपुरा नूरपुर, जिला बिजनौर में स्थित है। उनके पिता, अवधेश कुमार शर्मा, जय प्रकाश स्मृति इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान दिया है। उनके दादा, स्व. जय प्रकाश शर्मा, भी अपने समय में एक सम्मानित व्यक्ति थे।

सामाजिक और खेल में रुचि

मयंक शर्मा के जीवन में खेल और समाजसेवा दोनों का विशेष स्थान है। अधिवक्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने शारीरिक और मानसिक फिटनेस को भी प्राथमिकता दी है।

रिकॉर्ड बनाने की कोशिश

इस दौड़ को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने का लक्ष्य है, जो उनकी प्रतिबद्धता और मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा।

मयंक शर्मा की यह पहल न केवल अधिवक्ताओं के सम्मान को बढ़ाने का एक प्रयास है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी। उनके इस साहसिक प्रयास से समाज में अधिवक्ताओं की भूमिका और योगदान को एक नई पहचान मिलेगी। उनकी यह दौड़ भारत के लिए गौरव का विषय है और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगी।

 

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